झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को संथाल परगना में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान करने का निर्देश दिया

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को संथाल परगना क्षेत्र में रह रहे बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों की पहचान करने का निर्देश दिया है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने अवैध अप्रवास से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को पारित किया।

अदालत के फैसले में सरकार को क्षेत्र में मूल निवासियों और अवैध अप्रवासियों के बीच अंतर करने के लिए एक व्यापक अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, पीठ ने निर्देश दिया है कि राशन कार्ड, आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेज भूमि दस्तावेजों और आवेदकों की अधिवास स्थिति के गहन सत्यापन के बाद ही जारी किए जाने चाहिए।

READ ALSO  क्या आर्बिट्रेटर मध्यस्थता अधिनियम की धारा 33 के तहत दायर आवेदन पर अवार्ड को संशोधित कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

पीठ ने अवैध अप्रवास को एक “खतरनाक प्रस्ताव” और राज्य और केंद्र सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय बताया। अदालत ने आगे किसी भी जनसांख्यिकीय और सामाजिक असंतुलन को रोकने के लिए इन मुद्दों को संबोधित करने में तत्परता व्यक्त की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता डेनियल डेनिश ने इस बात पर प्रकाश डाला कि संथाल परगना के छह जिलों- देवघर, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा और जामताड़ा में अवैध अप्रवासी बसे हुए हैं। उन्होंने कई दशकों में एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय बदलाव को दर्शाने वाले आँकड़े प्रस्तुत किए, जिसमें आदिवासी आबादी का प्रतिशत 1951 में 44.67% से घटकर 2011 में 28.11% हो गया, जबकि इसी अवधि के दौरान अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिशत 9.44% से बढ़कर 22.73% हो गया।

Also Read

READ ALSO  दिल्ली  हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए CM केजरीवाल जाएंगे सुप्रीम कोर्ट : AAP सूत्र

इस मामले पर 22 अगस्त को अदालत द्वारा फिर से विचार किया जाना तय है, क्योंकि राज्य हाईकोर्ट के निर्देशों को लागू करने और क्षेत्र में अवैध अप्रवास द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles