झारखंड हाईकोर्ट ने अवमानना में चार अधिकारियों पर ₹25,000-₹25,000 का जुर्माना लगाया

झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जल संसाधन विभाग के चार वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का दोषी पाते हुए प्रत्येक पर ₹25,000 का जुर्माना लगाया।

न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी ने मुख्य सचिव प्रशांत कुमार, मुख्य अभियंता जमील अख्तर, तेनुघाट डैम के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार और कार्यपालक अभियंता रंजीत कुजूर पर यह दंड लगाया। अधिकारियों को यह राशि झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) में रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय के माध्यम से जमा कराने का निर्देश दिया गया है।

यह अवमानना याचिका लखन प्रसाद यादव ने दायर की थी, जो विभाग में क्लास-III टाइपिस्ट के पद पर कार्यरत थे। यादव ने 15 नवंबर 2000 से 27 दिसंबर 2020 तक का वेतन बकाया मांगा था।

हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर 2020 को विभाग को उनका बकाया वेतन देने का आदेश दिया था। विभाग ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, लेकिन 22 फरवरी 2023 को अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे 19 मार्च 2025 को खारिज कर दिया गया। शीर्ष अदालत में विभाग ने चार हफ्ते में बकाया राशि देने का वादा किया था।

सुप्रीम कोर्ट में वादा करने के बावजूद समय पर भुगतान नहीं हुआ, जिसके बाद यादव ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। 22 अगस्त को हुई सुनवाई में विभाग ने बताया कि याचिकाकर्ता को ₹1 लाख का भुगतान पहले किया गया था और बाद में ₹11.87 लाख अतिरिक्त राशि दी गई।

लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि भुगतान दावे की तारीख से काफी देर से हुआ और अधिकारियों ने अदालत में झूठा हलफनामा दायर किया। न्यायालय ने माना कि यह कोर्ट आदेश की जानबूझकर अवहेलना है और अधिकारियों को अवमानना का दोषी ठहराया।

मामले की अगली सुनवाई 12 सितंबर को होगी, जब हाईकोर्ट अनुपालन की समीक्षा करेगा।

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