Moratorium के दौरान ब्याज पर छूट देने के लिए तैयार सरकार; 2 करोड़ रुपये तक के ऋण में राहत

केंद्र सरकार ने Moratorium पर ब्याज की माफी के संबंध में गजेंद्र शर्मा बनाम भारत संघ के चल रहे मामले में एक शपथ पत्र दिनांक 02.10.2020 को दायर किया है।

इससे पहले सरकार ने Supreme Court को सूचित किया था कि वे इस मुद्दे पर उच्चतम स्तर पर चर्चा कर रहे हैं। यहाँ पढ़ें

यह शपथ पत्र वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में भारत सरकार के अवर सचिव द्वारा दायर किया गया है। यह Supreme Court द्वारा पारित आदेश दिनांक 10.09.2020 के अनुपालन में दायर किया गया है और साथ ही केंद्र सरकार द्वारा वैश्विक वित्तीय स्थिति में उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न शमनकारी कदमों के बारे में कोर्ट को अवगत कराने के लिए भी दायर किया गया है।

शपथ पत्र में, इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि सरकार ने लोगों को राहत देने के लिए कितने राजकोषीय उपाय किए हैं। सरकार ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा गरीब कल्याण पैकेज और आत्म निर्भार पैकेज जारी किया गया, जोकि 1.70 लाख करोड़ रूपये का था और जिसमें मुफ्त खाद्यान्न, दालें, और गैस सिलेंडर आदि दिये गये।

साथ ही आरबीआई द्वारा उधारदाताओं के लिए तरलता की उपलब्धता में वृद्धि हुई है, ब्याज (रेपो) दरों में कमी, विस्तारित समयसीमा पहले अनुमोदित संकल्प योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए, और उधारकर्ताओं के लिए स्थगन की घोषणा की और कोविड 19 द्वारा प्रभावित उधारकर्ताओं के लिए मौजूदा ऋण के पुनर्गठन के लिए एक रूपरेखा की घोषणा की।

इसके अलावा, सरकार ने ब्याज पर छूट के प्रभाव के बारे में कहा है कि यदि सरकार को सभी ऋणों और अग्रिमों पर छह महीने की अवधि के लिए ऋण लेने वालों के सभी वर्गों और श्रेणियों के लिए ब्याज माफ करती है तो सरकार को 6 लाख करोड़ को नुकसान होगा

शपथ पत्र में कहा गया है कि यदि बैंकों को यह बोझ उठाना पड़ता, तो वे अपने नेट वर्थ का एक बड़ा और प्रमुख हिस्सा खो देंगे, और उनके जीवित रहने पर बहुत गंभीर सवालिया निशान उठेगा । यह एक मुख्य कारण था कि ब्याज की माफी पर भी विचार नहीं किया गया था और केवल किस्तों का भुगतान टाल दिया गया था।

यह उल्लेख किया गया है कि अधिस्थगन की अवधि के दौरान ब्याज की चक्रवृद्धि के संबंध में सभी उधारकर्ताओं को राहत विशिष्ट श्रेणियों के लिए स्वीकार्य होगी, भले ही उधारकर्ता ने अधिस्थगन का लाभ उठाया हो या नहीं।

सरकार द्वारा कहा गया है कि इस संबंध में उचित अनुदान देने के लिए संसद से अनुमोदन प्राप्त किया जायेगा।
यह अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया है कि परिस्थितियों के तहत एकमात्र समाधान यह है कि सरकार चक्रवृद्धि ब्याज की छूट के परिणामस्वरूप बोझ को स्वंय वहन करे।
शपथ पत्र में कहा गया है कि सरकार ने निर्णय लिया है कि छह महीने की अधिस्थगन अवधि के दौरान चक्रवृद्धि ब्याज की छूट पर राहत उधारकर्ताओं की सबसे कमजोर श्रेणी तक सीमित होगी।

उधारकर्ताओं की यह श्रेणी, जिनके मामले में ब्याज की चक्रवृद्धि ब्याज माफ किया जाएगा , उसमें एमएसएमई ऋण और व्यक्तिगत ऋण, जोकि 2 करोड़ रूपये से अधिक न हो तक होंगे। सरकार ने 2 करोड़ तक के एमएसएमई लोन, एजुकेशन लोन, हाउसिंग लोन, उपभोक्ता टिकाऊ लोन, क्रेडिट कार्ड, ऑटो लोन, व्यक्तिगत ऋण और उपभोग ऋण होंगे को राहत देने के लिए चुना है।

दूसरे शब्दों में, कोई भी व्यक्ति / संस्था जिसकी ऋण राशि 2 करोड से अधिक नहीं है को ब्याज की कंपाउंडिंग की छूट के लिए पात्र होंगे।

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