गल्ती से जिन्दा कारतूस बैग मे रख लेना कोई अपराध नहीं- दिल्ली हाईकोर्ट


कल दिल्ली हाईकोट ने एक आदेश पारित किया, जिसमे एक विदेशी (अभियुक्त) के खिलाफ हैण्ड बैग में जिन्दा कारतूस मिलने के आरोप पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत एफआईआर दर्ज की गयी थी, जिसे हाईकोर्ट द्वारा निरस्त कर दिया गया।

जूनो एनोस बनाम दिल्ली राज्य के तथ्य काफी दिलचस्प हैं और इस प्रकार हैं

याचिकाकर्ता हवाई जहाज के माध्यम से दिल्ली से हैदराबाद की यात्रा कर रहा था। याचिकाकर्ता द्वारा लिए गऐ एक हैंड बैगेज से जिन्दा कारतूस एयरपोर्ट पर पकड़ी गई। कारतूस की खोज के आधार पर, एयरपोर्ट आथिरिटी द्वारा आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत एफआईआर दर्ज की गयी। याचिकाकर्ता ने पुलिस स्टेशन, डोमेस्टिक एयरपोर्ट में आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज एफआईआर नंबर 40/2018 को रद्द करने की मांग के साथ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट के सामने मुख्य सवाल

क्या याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर को इस तथ्य पर खारिज किया जा सकता है कि उसने अनजाने में अपने हैंड बैगेज में एक जिन्दा कारतूस रखा था और जबकि उसके पास हथियार रखने का एक वैध लाइसेंस है?

याचिकाकर्ता के आधार

  • याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके पास स्पेन में 15.02.2018 तक हथियार रखने का वैध लाइसेंस था, तथा जिस दिन जिन्दा कारतूस बरामद की गयी उस दिन भी लाइसेंस वैध था। यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता द्वारा लाइसेंस के नवीनीकरण हेतु समयान्तर्गत आवेदन भी कर दिया गया था।
  • आगे याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें किसी भी कारतूस की उपस्थिति का ज्ञान नहीं था, जो अनजाने में उनके हैण्ड बैग में आ गयी होगी।
  • याचिकाकर्ता के वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय धनवंत कौर बनाम राज्य 2016 एससीसी ऑनलाइन दिल्ली 5492 सहित विभिन्न निर्णयों पर भरोसा किया, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भूलवश जीवित कारतूस रख लेना कोई अपराध नहीं होगा। उक्त के आधार पर याचिकाकर्ता द्वारा एफआईआर को निरस्त करने की मॉंग की गयी।

राज्य सरकार का पक्ष

अभियोजन पक्ष ने इस तथ्य की पुष्टि की, कि दिल्ली से हैदराबाद की यात्रा के दौरान याचिकाकर्ता के कब्जे से बिना किसी बन्दूक के एक जिन्दा कारतूस मिली थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी पुष्टि की कि याचिकाकर्ता के पास स्पेन में इसके लिए वैध लाइसेंस था।

हाईकोर्ट का निर्णय-


दिल्ली उच्च न्यायालय ने माना कि बिना किसी बन्दूक के याचिकाकर्ता के बैग में केवल एक जिनद कारतूस मिली है, जोकि याचिकाकर्ता द्वारा अनजाने में अपने सामान में रख ली गयी थी, इसलिए एफ.आई.आर. को जारी रखने का कोई फायदा नहीं है। फलस्वरूप कोर्ट द्वारा एफ.आई.आर. को निरस्त कर दिया गया।

Case Details

Court: Delhi High Court

Title: Carlos Junco Anos vs State NCT of Delhi

Case No.- W.P. (Crl.) 1489 of 2020

Date of Decision:  21.09.2020

Quorum: Hon’ble Mr. Justice Yogesh Khanna

Appearance: Mr. Rohit Nagpal for Petitioner and Mr.Ranbir Singh Kundu, ASC for the State

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