जमानत के दौरान सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकता बलात्कार का आरोपी

17 सितंबर 2020 को केरल उच्च न्यायालय ने एक जममानत याचिका की सुनवाई करते हुए रेप के आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी कि वह मुकदमे के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेगा।

मुहम्मद शिफा बनाम केरल राज्य मामले के संक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैं

इस मामले में अभियुक्त (याचिकाकर्ता) के खिलाफ धारा 370, 376, 376 (2) (द), 509, 506 आईपीसी और पोस्को अधिनियम, 2012 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है। अभियोजन पक्ष ने कहा है कि आरोपी पीड़िता को 22.12.2018 को एक रिसॉर्ट में ले गया और फिर उसके साथ बलात्कार किया। यह भी आरोप है कि उसने पीड़िता की विभिन्न नग्न तस्वीरों को कैद किया और पीड़िता से कहा कि यदि वह पुलिस से संपर्क करती है या उसके द्वारा किए गए किये गये जघन्य अपराध के बारे में किसी को बताती है तो वह उसकी तसवीरों को इंटरनेट पर प्रसारित कर देगा।

अभियोजन के अनुसार, आरोपी ने पीड़िता के साथ विभिन्न अवसरों पर कम से कम छह बार बलात्कार किया और उसे धमकी दी कि वह तस्वीरों को लीक कर देगा।

यह भी आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने फेक नाम से फेसबुक पर एक फर्जी प्रोफाइल बनाई और उसपर पीड़िता की तस्वीरें पोस्ट कीं। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने तस्वीरों को हटाने के लिए 100000 रुपये की राशि की मांग की। इस मामले में आरोपी को 23.08.2020 को हिरासत में ले लिया गया था।

अभियुक्त की ओर से तर्क

  • आरोपी के वकील ने दलील दी कि आरोपियों पर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं।
  • उन्होंने यह भी कहा है कि पीड़ित और आरोपी एक दूसरे से प्यार करते थे और उनके परिवारों ने भी उनकी शादी तय कर दी थी, लेकिन पीड़िता ने किसी कारण से शादी से इनकार कर दिया।
  • वकील ने यह भी बताया कि कथित अपराध 22.12.2018 को हुआ था, लेकिन पीड़िता ने केवल 14.8.2020 को अपना बयान दिया। इसलिए, पीड़ित की गवाही और अपराध की तारीख के बीच काफी अंतर था।
  • वकील ने अदालत को सूचित किया कि आरोपी अब भी पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार है।

लोक अभियोजक द्वारा उठाए गए तर्क

  • अभियोजक ने जमानत अर्जी का विरोध किया और अदालत से इसे खारिज करने का आग्रह किया।
  • अभियोजक ने तर्क दिया कि यह सिर्फ बलात्कार का मामला नहीं है, बल्कि अभियुक्त ने आई टी एक्ट अधिनियम की धाराओं का भी उल्लंघन किया, क्योंकि आरोपी ने पीड़िता की नग्न तस्वीरें लीं और उन्हें इण्टरनेट पर प्रसारित करने की धमकी दी थी।

न्यायालय का तर्क

अदालत ने जमानत अर्जी पर विचार करते हुए कहा कि पीड़िता ने खुद स्वीकार किया है कि वह और आरोपी प्रेम में थे। यह भी ध्यान दिया गया कि आरोपी केवल 23 वर्ष का था और उसके सामने उसका पूरा जीवन था। पीड़िता के अनुसार मुख्य शिकायत यह थी कि आरोपी ने उसकी तस्वीरें प्रसारित की थीं और वह फिर से ऐसा कर सकता है।

कोर्ट का फैसला

केरल उच्च न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 439 (क) का उल्लेख किया जो उन पाबंदियों से संबंधित है, जो जमानत के मामले में लगाई जा सकती हैं और निर्देश दिया कि अभियुक्त को जमानत दी जाए, लेकिन वह जब तक मुकदमा चल रहा है फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का उपयोग नही करेगा

न्यायालय ने यह भी कहा कि कोविड -19 महामारी के कारण जेल में कैदियों की संख्या को कम करने की आवश्यकता है, जिससे सबंधि सर्वोच्च न्यायालय ने भी दिशा निर्देश जारी किये है।

Case Details:-

Title: Muhammed Shifas vs the State of Kerala

Case Number: Crime No.1017/2020

Quorum: Hon’ble Judge P.V Kunhikrishnan

Appearance:- Mr K. I Abdul Rasheed for the petitioner and Mr. Ajit Murali, for the respondents.

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