Supreme Court: बच्चे की कस्टडी के मामले मे उसका हित देखना सर्वोपरी

अपने हालिया फैसले में, Supreme Court ने एक पिता पर कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए दो अनुचित शर्तों को खारिज कर दिया, जो अपने बच्चे को अपने देश (यूएसए) में वापस जे जानेे की इच्छा रखता था।

High Court ने यह शर्त लगाई थी कि बच्चे को केवल यूएसए में तभी ले जाया जा सकता है, जब एक प्रमाण पत्र दिया जाये कि कि भारत कोविड-19 महामारी से मुक्त हो गया है। 

नीलांजन भट्टाचार्य बनाम कर्नाटक राज्य और अन्य मामले केसंक्षिप्त तथ्य इस प्रकार हैः

अपीलकर्ता और दूसरे प्रतिवादी की 30.11.2012 को शादी हुई, और उनकी शादी 25.02.2013 को अभिलेखों में दर्ज की गई, जिसके बाद दोनों पक्ष 2015 में अमेरिका चले गये।

दिनांक 25.02.2016 को एक बेटे का जन्म हुआ , जोकि एक अमेरिकी नागरिक बना।

मार्च 2019 में, दूसरी प्रतिवादी और बच्चे ने भारत आये और अपीलकर्ता को सूचित किया गया कि उनकी यूएसए में वापस जाने की कोई योजना नहीं है।

अपीलकर्ता ने मार्च 2019 में भारत की यात्रा की और संयुक्त राज्य अमेरिका में वापस आने के लिए दूसरे प्रतिवादी को मनाने की कोशिश की। दूसरी प्रतिवादी के साथ सामंजस्य स्थापित करने के उनके सभी प्रयास विफल रहे। अपीलकर्ता ने 16.04.2019 को न्यूजर्सी के सुपीरियर कोर्ट, हडसन काउंटी, चांसरी डिवीजन फैमिली कोर्ट के समक्ष मामला दायर किया और अदालत से अनुरोध किया कि उसे बच्चे की कस्टडी दे दी जाए।

न्यू जर्सी के सुपीरियर कोर्ट ने 21.05.2019 को अपना आदेश पारित किया और अपीलकर्ता को बच्चे की कानूनी हिरासत प्रदान की। 06.06.2019 को न्यू जर्सी कोर्ट के समक्ष एक तलाक याचिका भी दायर की गई थी।

इसके बाद 13.09.2020 को अपीलकर्ता ने कर्नाटक के उच्च न्यायालय के समक्ष हैबियस कॉर्पस का रिट दायर किया। कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक आदेश पारित किया जिसमें कहा गया कि अपीलकर्ता बच्चे को वापस यूएसए ले जा सकता है। हालाँकि, उच्च न्यायालय ने निम्न दो शर्ते लगायी –

  1. जिला स्वास्थ्य कार्यालय बेंगलुरु के एक अधिकारी को यह प्रमाणित करना होगा कि भारत कोविड 19 से मुक्त है और नाबालिग बच्चे के लिए अमरीका की यात्रा करना सुरक्षित था।
  2. संयुक्त राज्य अमेरिका में एक चिकित्सा प्राधिकरण से एक प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाना चाहिए जिसमें कहा गया हो कि उस क्षेत्र में कोविड 10 का कोई खतरा नहीं है जहां बच्चे को स्थानांतरित किया जाना है।

अपीलकर्ता ने Supreme Court का रुख किया और ऊपर उल्लिखित शर्तों को चुनौती दी।

Supreme Court के समक्ष कार्यवाही

दूसरी- प्रतिवादी (पत्नी) अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुई, जबकि उसे नोटिस दिया गया था। पत्नी ने न्यायालय को सूचित किया कि उन्हें उच्च न्यायालय के आदेश के संबंध में कोई आपत्ति नहीं है और उन्होंने अपीलकर्ता के साथ बच्चे को यूएसए में स्थानांतरित करने की अनुमति दी है। 

Supreme Court ने भारत में न्यायालयों द्वारा विशेष रूप से निथ्या आनंद राघवन बनाम राज्य (दिल्ली के एनसीटी) मंे दिए गए विभिन्न निर्णयों को देखा, जहां यह कहा गया था कि हमारे देश भारत ने 1980 के हेग सम्मेलनों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं , जिसका उद्देश्य माता-पिता को सीमाओं के पार बच्चों का अपहरण करने से रोकना है।

Supreme Court ने यह भी देखा कि जिन मामलों में एक बच्चा किसी विदेशी देश का निवासी है और उसे भारत लाया जाता है, अगर बच्चे को उनके मूल राज्य से निकालने के तुरंत बाद कार्यवाही शुरू की गई है और बच्चे को भारत में जड़ें नहीं मिली हैं, ऐसे मामलों में, भाषा और सामाजिक रीति-रिवाजों के अंतर के कारण बच्चे को मूल स्थिति में लौटना फायदेमंद होगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे के सर्वाेपरि कल्याण का पता लगाने के लिए मामले में विस्तृत जांच करने की आवश्यकता नहीं है, इस तरह की जाँच से विदेशी न्यायालय को छोड़ना पड़ता है।

इसके अलावा कोर्ट ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि अपीलकर्ता पेशेवर रूप से अच्छा कर रहा था और बच्चे के जीवन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। कोर्ट ने दूसरी प्रतिवादी के संचार पर भी भरोसा किया, जिसमें कहा गया था कि अगर बच्चा पिता के साथयूएसए जाता है तो उसे कोई आपत्ति नहीं है।

मामले के सभी तथ्यों से गुजरने के बाद, न्यायालय ने कहा कि बच्चे का अपने पिता के साथ यूएसए जाना सर्वाेत्तम हित में है।

उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तों के मुद्दे पर, सर्वाेच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने न्यायालय को आश्वासन दिया था कि वह केवल तभी यूएसए की यात्रा करेंगे जब भारत में चीजें बेहतर होंगी और सभी दिशानिर्देशों का पालन करेंगे।

Supreme Court ने अपीलकर्ता के इस तर्क से भी सहमति व्यक्त की कि देश को कोविड 19 से मुक्त बताते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका से ऐसा प्रमाण प्राप्त करना असंभव होगा। न्यायालय ने यह भी देखा कि अपीलकर्ता द्वारा दायर किए गए सबूतों के आधार पर, न्यू जर्सी के बेयोन में कोरोनोवायरस के केवल नौ मामले थे, जहां अपीलकर्ता का अपना सामान्य निवास स्थान है।

Supreme Court का निर्णय 

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई शर्तें न्यायोचित नहीं हैं और वह निरस्त करने योग्य है। कोर्ट ने अपीलकर्ता को निर्देश दिया कि वह बच्चे को यूएसए ले जाते समय सभी आवश्यक सावधानियां बरतेंगे।

Case Details:-

Title: Sri Nilanjan Bhattacharya Versus The State of Karnataka and Others

Case No.: Civil Appeal 3284 of 2020

Date of Order:23.09.2020

Coram: Hon’ble Justice Dr Dhananjaya Y Chandrachud, Hon’ble Justice Indu Malhotra and Hon’ble Justice K.M. Joseph

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