क्या अस्पताल में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध मौलिक अधिकार का उल्लंघन? कलकत्ता हाईकोर्ट

एक याचिका High Court ,कलकत्ता में दायर की गई थी जहाँ याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें  अस्पताल परिसर में  COVID 19 मरीज़ों के लिये मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया था। 

22.04.2020 को पश्चिम बंगाल की सरकार ने यह कहते हुए सेल फोन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश पारित किया था कि मोबाइल फोन  का प्रयोग कोरोनावायरस को फैला सकता है।

याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए तर्क: –

  • याचिकाकर्ताओं के अनुसार आदेश बिना किसी आधार के पारित किए गए थे, और यह मनमाना था।
  • यह भी न्यायालय को प्रस्तुत किया गया था कि किसी अन्य राज्य सरकार ने ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया था।
  • याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि  मोबाइल फोन एक COVID -19 रोगी और उसके परिवार के बीच वार्तालाप करने के लिये जरूरी है । यदि मरीज़ अपने परिवार के साथ बातचीत नही कर पायेगें तो वे  दुःखी के साथ चिंतित भी होंगे।
  • यह भी कहा गया कि संचार एक मौलिक अधिकार है, तथा इसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है।
  • याचिकाकर्ताओं ने आगे तर्क दिया कि राज्य सरकार के पास यह दावा करने के लिए कोई प्रमाणिक साक्ष्य नहीं था कि मोबाइल फोन के द्वारा कोरोनावायरस फैल सकता है। 

राज्य सरकार के द्वारा दिये गये तर्क :-

  • प्रतिवादी राज्य सरकार  ने कहा कि यह आदेश  एम्स रायपुर की एक रिपोर्ट पर निर्भर था जिसमें कहा गया था कि मोबाइल फोन कोविड -19 के प्रसार के लिए एक संभावित कारण हो सकता है।
  • यह भी कहा गया   कि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार,  मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग COVID19 महामारी को नियंत्रित करने में  कठिन हो सकता है।
  • प्रतिवादी ने यह भी कहा कि मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध अस्पतालों के अन्य सदस्यों के साथ-साथ डॉक्टरों, वार्ड ब्वायज और नर्सों पर भी लागू होता है।  प्रतिबंध के लिए किसी भी मरीज़ को बाहर नहीं निकाला गया था।
  • यह भी कहा गया कि इसके लिये कई व्यवस्थाएं की गई थीं जिससे मरीज़ अपने परिवारों के संपर्क में रह सकें। अस्पताल के वार्डों में लैंडलाइन फोन लगाए गए हैं, और वीडियो कॉल की सुविधा भी प्रदान की गई है।
  • सरकार के प्रतिवादी ने यह भी उल्लेख किया कि कई अस्पतालों में, मोबाइल फोन के उपयोग की अनुमति दी गई थी। सिर्फ एमआर बांगुर अस्पताल और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सेल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध है, क्योंकि कई महत्वपूर्ण कोविड -19 रोगियों को वहां भर्ती किया जाता है।
  • यह भी प्रस्तुत किया गया था कि अस्पताल में एक परिचर रखने अनुमति दी जाती है ताकि परिवार रोगी की जांच कर सके।

High Court का विश्लेषण

High Court ने देखा कि मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध ने अस्पताल में मौजूद रोगियों और अन्य लोगों (अस्पताल के कर्मचारियों, डॉक्टरों की नर्सों, आदि) के मुफ्त संचार के  मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है।

न्यायालय ने कहा कि यह सच है कि इस बात का कोई निर्णायक सबूत नहीं है कि मोबाइल फोन वायरस का संभावित वाहक है तथा  कोई भी निर्णायक सबूत नहीं है कि मोबाइल फोन कोरोनावायरस के संभावित वाहक नहीं हो सकते। 

उपरोक्त कथन में अपनी राय देते हुये, High Court ने कहा कि सरकार द्वारा पारित आदेश को अनुचित नहीं कहा जा सकता है।

न्यायालय ने सरकार द्वारा उठाए गए उपाय की सराहना की जहां लैंडलाइन और वीडियो कॉलिंग की सुविधा प्रदान करके मोबाइल फोन पर प्रतिबंध था।

प्रतिवादियों  द्वारा जारी अखबारों की रिपोर्ट के बारे में, अदालत ने कहा कि समाचार पत्रों में  दी गई जानकारियाँ संदिग्ध  हैं और जब तक कि रिपोर्ट के लेखक के द्वारा हलफनामे का समर्थन नहीं किया जाता है, तब तक अदालत द्वारा कोई कानूनी कार्यवाही नही की जानी चाहिये। 

इस मुद्दे पर कि एमआर बांगुर अस्पताल और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे हैं। इसलिए मोबाइल फोन पर प्रतिबंध आवश्यक था, न्यायालय इस बात से असहमत था  कि यह नहीं कहा जा सकता है कि सिर्फ दो अस्पताल ही  गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे हैं,अन्य अस्पतालों में भी गंभीर मरीजों का इलाज नही हो रहा है। 

कोर्ट का निर्णय: –

कोर्ट ने अस्पतालों में मोबाइल फोन के उपयोग करने पर प्रतिबंध हटा दिया, जिसमें एमआर बांगुर अस्पताल और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल शामिल हैं। न्यायालय ने कहा कि यदि राज्य सरकार एमआर बांगुर अस्पताल और कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना चाहता है, तो उसे लिखित रूप में  कारण प्रदान करने होंगे।

Case Details:-

Title:- Arjun Singh -Vs.- The State of West Bengal & Ors.

Case No. WPA 5374 of 2020

Date of Order: 30.09.2020

Coram: Hon’ble Chief Justice Thottathil B. Radhakrishnan and Hon’ble Justice Arijit Banerjee.

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