गुरुग्राम में चार वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने इस मामले की जांच में कथित कोताही पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी (IO) को 25 मार्च को मामले के सभी रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
अदालत का यह हस्तक्षेप उस याचिका पर आया है जिसमें मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) को सौंपने की मांग की गई है। जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में पुलिस को अब तक की प्रगति का पूरा ब्यौरा देना होगा।
जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के जिला न्यायाधीश को संबंधित मजिस्ट्रेट से जवाब तलब करने का निर्देश दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मजिस्ट्रेट ने इस संवेदनशील मामले को बेहद ‘असंवेदनशील’ तरीके से संभाला।
शीर्ष अदालत ने 20 मार्च को सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी द्वारा मामले का विशेष उल्लेख किए जाने के बाद इस पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति जताई थी। रोहतगी ने अदालत को बताया कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने विस्तृत बयान दर्ज कराया था, जिसमें घटना की पूरी जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद पुलिस ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है।
सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने जांच की मौजूदा स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने न तो अपराध स्थल (Crime Scene) को सुरक्षित किया और न ही घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में घर में काम करने वाले सहायकों की संलिप्तता की आशंका है, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
रोहतगी ने पीठ के समक्ष कहा, “अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। सबूतों को सुरक्षित करने के लिए घटनास्थल की घेराबंदी तक नहीं की गई। सीसीटीवी फुटेज भी नहीं लिया गया है।”
शुरुआत में चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने का सुझाव दिया था, लेकिन वरिष्ठ वकील ने तर्क दिया कि पीड़िता के पिता गुरुग्राम में कार्यरत हैं जबकि संबंधित हाईकोर्ट चंडीगढ़ में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस “भयावह मामले” में देश की सर्वोच्च अदालत की ओर से एक कड़ा संदेश जाना जरूरी है, जिसके बाद कोर्ट ने सीधे सुनवाई का निर्णय लिया।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी, जहां गुरुग्राम पुलिस को जांच में हुई देरी और अब तक की गई कार्रवाई पर जवाब देना होगा।

