ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल को NGT की मंजूरी; EC में पर्याप्त पर्यावरणीय सुरक्षा उपाय: न्यायाधिकरण

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने ग्रेट निकोबार द्वीप में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (ICTT) परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी (EC) के साथ बरकरार रखते हुए कहा है कि मंजूरी की शर्तों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं और यह द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र (ICRZ) अधिसूचना का उल्लंघन नहीं करती।

कोलकाता स्थित पूर्वी क्षेत्रीय पीठ, जिसकी अध्यक्षता NGT के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की, ने टर्मिनल, टाउनशिप, क्षेत्रीय विकास और 450 एमवीए गैस व सौर आधारित पावर प्लांट को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

यह परियोजना से जुड़ी दूसरी चरण की मुकदमेबाजी थी। अप्रैल 2023 में अधिकरण ने पर्यावरणीय मंजूरी को व्यापक रूप से बरकरार रखते हुए कुछ मुद्दों की जांच के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) गठित की थी।

वर्तमान आदेश में अधिकरण ने कहा कि पूर्व में चिन्हित मुद्दों पर HPC ने विचार कर लिया है और आवश्यक सुरक्षा उपाय EC की शर्तों में शामिल किए जा चुके हैं।

अधिकरण ने कहा:
“हम पाते हैं कि EC की शर्तों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय प्रदान किए गए हैं… प्रथम चरण में अधिकरण ने EC में हस्तक्षेप से इनकार किया था और शेष मुद्दों का HPC द्वारा समाधान किया जा चुका है… परियोजना के रणनीतिक महत्व तथा अन्य प्रासंगिक पहलुओं को देखते हुए हस्तक्षेप का कोई उचित आधार नहीं है।”

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अधिकरण ने परियोजना के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ICRZ अधिसूचना की शर्तों की अनदेखी भी नहीं की जा सकती, इसलिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।

आदेश में कहा गया:
“यह ऐसा मामला है जहाँ परियोजना के रणनीतिक महत्व से इंकार नहीं किया जा सकता, न ही ICRZ अधिसूचना की शर्तों की उपेक्षा की जा सकती… अतः संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।”

NGT ने दर्ज किया कि EC में ग्रेट निकोबार की पारिस्थितिकी और स्थानिक प्रजातियों की सुरक्षा के लिए विशेष शर्तें शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • लेदरबैक समुद्री कछुआ
  • निकोबार मेगापोड
  • खारे पानी का मगरमच्छ
  • निकोबार मकाक
  • रॉबर क्रैब एवं अन्य स्थानिक पक्षी
  • ज्वारीय क्षेत्र की वनस्पति व जीव
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साथ ही मैंग्रोव पुनर्स्थापन, कोरल ट्रांसलोकेशन, आक्रामक प्रजातियों के प्रभाव का नियंत्रण तथा शोमपेन और निकोबारी जनजातियों के कल्याण से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं।

अधिकरण ने कहा कि ICRZ अधिसूचना के उल्लंघन का कोई मामला नहीं बनता। हालांकि उसने पर्यावरण मंत्रालय और नियामक एजेंसियों को EC की शर्तों के सख्त अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी।

अधिकरण ने निर्देश दिया कि फोरशोर विकास के कारण तटरेखा में क्षरण या बदलाव नहीं होना चाहिए और द्वीप के रेतीले समुद्र तट सुरक्षित रखे जाएँ, क्योंकि यही कछुओं और पक्षियों के घोंसले बनाने के प्रमुख स्थल हैं तथा द्वीप की पारिस्थितिक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

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NGT ने कहा कि निर्माण गतिविधियों के दौरान तटरेखा में किसी प्रकार का परिवर्तन न हो, इसके लिए निरंतर निगरानी आवश्यक है और EC की सभी शर्तों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

इन टिप्पणियों के साथ अधिकरण ने पर्यावरणीय मंजूरी में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल परियोजना को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

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