अनुमेय सीमा से अधिक कोडीन युक्त कफ सिरप रखने पर NDPS अधिनियम लागू: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित कोडीन युक्त कफ सिरप रैकेट से जुड़े मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अनुमेय सीमा से अधिक कोडीन की तैयारी रखने पर NDPS अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे और ऐसे मामलों में वैधानिक छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता।

न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 3 फरवरी के आदेश में अब्दुल कादिर और एक अन्य आरोपी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि उनके पास से बड़ी मात्रा में अवैध रूप से डायवर्ट किया गया कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुआ है और चिकित्सीय उपयोग की छूट का लाभ इस स्थिति में उपलब्ध नहीं है।

आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाना, जिला रामपुर में NDPS अधिनियम की धारा 8/21 तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3) और 340 के तहत मुकदमा दर्ज है।
अभियोजन के अनुसार, आरोपियों के पास से 119 बॉक्स में रखी 11,885 बोतलें कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद की गईं, जब वे इसे कार में लोड कर रहे थे।

आरोपियों ने दलील दी कि वे लाइसेंस प्राप्त दवा विक्रेता हैं और कफ सिरप वैध बिलों के माध्यम से खरीदा गया था। यह भी कहा गया कि उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और ड्रग इंस्पेक्टर को सैंपल लेने और सील करने का अधिकार नहीं था।

न्यायालय ने कहा कि कोडीन (मिथाइलमॉर्फिन) और उसके साल्ट्स को 14 नवंबर 1985 की केंद्र सरकार की अधिसूचना में “मैन्युफैक्चर्ड ड्रग” के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
छूट केवल तभी उपलब्ध है जब कोडीन का उपयोग चिकित्सीय प्रयोजन में हो, प्रति डोज 100 मिलीग्राम से अधिक न हो और अविभाजित तैयारी में उसकी सांद्रता 2.5 प्रतिशत से अधिक न हो।

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न्यायालय ने कहा कि छूट संबंधी प्रावधानों का “कड़ाई और शाब्दिक रूप से पालन” आवश्यक है और किसी भी शर्त के उल्लंघन पर छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता।

“वर्तमान मामले में आरोपियों के पास से अवैध रूप से डायवर्ट की गई कोडीन युक्त कफ सिरप की भारी मात्रा बरामद हुई है, जिससे ‘चिकित्सीय उपयोग’ की शर्त का घोर उल्लंघन होता है और उन्हें छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता,” अदालत ने कहा।

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बड़ी मात्रा में बरामदगी को देखते हुए न्यायालय ने कहा कि आरोपियों को झूठा फंसाए जाने का कोई कारण नहीं दिखता। साथ ही, बचाव पक्ष की दलीलें मामले के गुण-दोष से संबंधित हैं, जिन पर जमानत चरण में विचार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा, “इस चरण पर आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का कोई उचित आधार नहीं है,” और जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

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