दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को आतंक वित्तपोषण मामले में बारामूला सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से पूछा कि यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो क्या उनकी आवाजाही को किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस चरण पर जमानत के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ राशिद की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के 21 मार्च 2025 के आदेश को चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने उनकी दूसरी नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
राशिद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि वह 2019 से हिरासत में हैं और छह-साढ़े छह वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं। इस दौरान उन्हें दो बार अंतरिम जमानत मिली और उन्होंने किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं किया।
यह भी कहा गया कि गवाहों को प्रभावित करने की NIA की आशंका निराधार है। वकील ने यह भी बताया कि राशिद को पहले हिरासत में रहते हुए संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
ट्रायल की प्रगति का उल्लेख करते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन ने पहले 378 गवाहों की सूची दी थी, जिसे बाद में घटाकर 248 कर दिया गया, और मुकदमे के शीघ्र समाप्त होने की संभावना नहीं है। इसलिए लंबे समय से चली आ रही हिरासत के आधार पर जमानत दी जानी चाहिए।
राशिद ने लोकसभा सत्र में भाग लेने के लिए भी जमानत मांगी और कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र और संसद के बीच सेतु की भूमिका निभाते हैं।
सुनवाई के दौरान पीठ ने NIA के वरिष्ठ वकील से निर्देश लेकर बताने को कहा कि यदि जमानत दी जाती है तो क्या राशिद की आवाजाही को किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित करने जैसी शर्त लगाई जा सकती है। अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि वह इस संबंध में कोई अंतिम राय नहीं दे रही है।
NIA के वकील ने जमानत का विरोध दोहराया, लेकिन अदालत के प्रश्न पर निर्देश लेने की बात कही।
राशिद को 2017 के आतंक वित्तपोषण मामले में NIA ने 2019 में गिरफ्तार किया था और तब से वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बारामूला सीट से उमर अब्दुल्ला को हराया था।
NIA की एफआईआर के अनुसार उनका नाम सह-आरोपी कारोबारी जाहूर वटाली से पूछताछ के दौरान सामने आया। अक्टूबर 2019 में आरोपपत्र दाखिल किया गया और मार्च 2022 में विशेष NIA अदालत ने उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं 120B, 121 और 124A तथा गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप तय किए।
ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद राशिद ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई अब 11 मार्च को आगे होगी।

