इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि जब कुछ सबूतों के साथ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए जाते हैं, तो इसे केवल एक सिविल मामले के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाले आपराधिक पुनरीक्षण पर
