दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को स्थानीय अदालत में स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ सरकारी अधिकारियों को लेकर दिए गए कथित बयान के मामले में कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है। पुलिस ने अदालत को सौंपी अपनी स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) में कहा कि इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने का कोई कानूनी आधार मौजूद नहीं है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार के समक्ष प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में पुलिस ने कहा कि पूरे कार्यक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग देखने से साफ होता है कि मुख्यमंत्री ने भगवान हनुमान का उपहास नहीं उड़ाया और न ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इसके विपरीत, वह भगवान हनुमान के पराक्रम की मिसाल देते हुए दिल्ली सरकार के कर्मचारियों की कार्यक्षमता और समर्पण की सराहना कर रही थीं।
यह पूरा मामला दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डीपीसीसी) के आरटीआई विभाग के चेयरमैन और ऑल इंडिया सीमांचल जन विकास परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामनिवास शर्मा की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि 23 सितंबर 2025 को कश्मीरी गेट आईएसबीटी पर उत्तर प्रदेश के बड़ौत के लिए डीटीसी बस सेवा के शुभारंभ के दौरान मुख्यमंत्री ने लापरवाह अधिकारियों को डांटते हुए विवादित टिप्पणी की थी। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि ये हनुमान अपनी शक्तियों को तभी याद करते हैं जब पूंछ में आग लगती है, उससे पहले वे इसे भूल जाते हैं।
धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप खारिज
पुलिस ने अदालत को बताया कि शिकायतकर्ता ने संदर्भ को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के इरादे से वीडियो के कुछ हिस्सों और शब्दों को जानबूझकर नजरअंदाज किया। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री का पूरा भाषण सकारात्मक और उत्साहवर्धक था, जिसे सुनकर वहां मौजूद जनता ने तालियां बजाईं और नारे भी लगाए।
पुलिस रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के कानूनी प्रावधानों के तहत जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया अपमान साबित होना अनिवार्य है। केवल किसी खास अंश को चुनकर आहत होने का दावा करने से कानूनी अनिवार्यताएं पूरी नहीं होती हैं। इसके अलावा, शिकायतकर्ता यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि उसे कब और कैसे ठेस पहुंची, खासकर तब जब शिकायत घटना के तीन दिन बाद बिना किसी स्पष्ट कारण के दर्ज कराई गई थी।
शिकायत को बताया राजनीति से प्रेरित
कश्मीरी गेट थाने के एसएचओ द्वारा अग्रसारित और सब-इंस्पेक्टर मुकेश तोमर द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में शिकायतकर्ता की राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए इसे सोची-समझी राजनीतिक रंजिश करार दिया गया।
पुलिस ने स्थिति रिपोर्ट के साथ मुख्यमंत्री के भाषण का पूरा विवरण (ट्रांसक्रिप्ट) और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की वैधता साबित करने के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) के तहत प्रमाण पत्र भी अदालत में पेश किया।
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता के वकील ने पुलिस की इस रिपोर्ट पर अपना जवाब और आपत्ति दर्ज कराने के लिए अदालत से समय मांगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर तय की है।

