नई दिल्ली – दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने शनिवार की अदालती कार्यवाहियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए काम के बहिष्कार का ऐलान किया है। एसोसिएशन की कार्यकारी समिति द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय के अनुसार, वकील 4 अप्रैल, 2026 से हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को अदालती कामकाज से दूर रहेंगे।
यह निर्णय दिल्ली हाईकोर्ट के उस हालिया आदेश के विरोध में लिया गया है, जिसमें इन शनिवारों को नियमित कामकाजी दिन घोषित किया गया था। बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट प्रशासन के बीच कार्य दिवसों को लेकर उपजा यह विवाद अब एक गंभीर मोड़ ले चुका है।
शनिवार की सुनवाई पर बढ़ा विवाद
विवाद की जड़ 15 जनवरी, 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जारी की गई वह अधिसूचना है, जिसके तहत महीने के पहले और तीसरे शनिवार को भी वर्किंग डे बना दिया गया था। इससे पहले ये दिन आमतौर पर गैर-कार्यकारी होते थे, जिनका उपयोग वकील अपने चैंबर के काम, रिसर्च और प्रशासनिक कार्यों के लिए करते थे।
DHCBA के अध्यक्ष, सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन और मानद सचिव विक्रम सिंह पंवार द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस के मुताबिक, बार एसोसिएशन ने इस नीति पर पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट के समक्ष कई बार अपनी बात रखी। हालांकि, एसोसिएशन का कहना है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अब तक कोई राहत या बदलाव नहीं किया गया है।
पेशेवर दक्षता और व्यक्तिगत जीवन पर असर
27 मार्च को हुई बैठक में DHCBA की कार्यकारी समिति ने जोर देकर कहा कि शनिवार को अदालत लगने से वकीलों के सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां पैदा हो रही हैं, जिससे कानूनी प्रतिनिधित्व की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। एसोसिएशन ने मुख्य रूप से निम्नलिखित चिंताओं को रेखांकित किया:
- तैयारी और परामर्श: नए शेड्यूल के कारण वकीलों को केस की रिसर्च, ड्राफ्टिंग और मुवक्किलों के साथ जरूरी मशविरे के लिए मिलने वाला समय कम हो जाएगा।
- कार्य-जीवन संतुलन (Work-Life Balance): कानूनी पेशे की भागदौड़ भरी प्रकृति को देखते हुए, वकीलों ने चिंता जताई कि बिना किसी साप्ताहिक अवकाश के उनके मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ेगा।
- व्यावसायिक कुशलता: बार का तर्क है कि यदि वकीलों को अदालती समय के बाहर अपने कार्यालय संभालने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा, तो उनकी समग्र पेशेवर कुशलता में गिरावट आएगी।
विरोध की रणनीति और कोर्ट का कामकाज
अदालती कार्यवाही में पूरी तरह व्यवधान न आए, इसे ध्यान में रखते हुए DHCBA ने एक बीच का रास्ता निकाला है। एसोसिएशन ने सुझाव दिया है कि प्रभावित शनिवारों को प्रत्येक कोर्ट के लिए ‘प्रॉक्सि काउंसिल’ (Proxy Counsel) नामित किए जाएं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि जब बार के अधिकांश सदस्य विरोध स्वरूप कामकाज से दूर रहें, तब भी बेहद जरूरी मामलों में प्रतिनिधित्व बना रहे और न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह ठप न हो।
DHCBA ने एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट से 15 जनवरी की अधिसूचना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। समिति ने उम्मीद जताई है कि कानूनी बिरादरी के हितों और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन जल्द ही उचित कदम उठाएगा। फिलहाल, 4 अप्रैल 2026 को विरोध स्वरूप कार्य बहिष्कार का पहला दिन तय है।

