बुजुर्ग गृहिणियों का घरेलू काम उम्र के साथ बेअसर नहीं होता: दिल्ली हाईकोर्ट ने बढ़ाई सड़क हादसे की पीड़िता की मुआवजा राशि

दिल्ली हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई 81 वर्षीय बुजुर्ग गृहिणी के मुआवजे में 6.37 लाख रुपये से अधिक की बढ़ोतरी करते हुए इसे बढ़ाकर 20.79 लाख रुपये कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बढ़ती उम्र के साथ किसी गृहिणी के अवैतनिक घरेलू श्रम और परिजनों की देखभाल का आर्थिक मूल्य समाप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि वृद्ध महिलाओं की भूमिका को लेकर उम्र आधारित धारणाएं पूर्वाग्रह और रूढ़िवादिता को बढ़ावा देती हैं।

जस्टिस अनीश दयाल की एकल पीठ ने 12 अक्टूबर को यह फैसला सुनाते हुए मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के पूर्व आदेश में संशोधन किया। न्यायाधिकरण ने पहले पीड़िता को 14.42 लाख रुपये का मुआवजा मंजूर किया था, लेकिन औपचारिक नौकरी न होने और घरेलू योगदान का दस्तावेजी प्रमाण पेश न कर पाने के आधार पर आय और भविष्य की कमाई के नुकसान का कोई हर्जाना देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने इस दृष्टिकोण को खारिज करते हुए कहा कि केवल उम्र के आधार पर किसी गृहिणी को परिवार पर निर्भर मान लेना और उसके आर्थिक योगदान को अनदेखा करना गलत है।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब कोई दादी या नानी अपने पोते-पोतियों की देखभाल करती हैं, तभी उनके माता-पिता नौकरी या कारोबार कर पाते हैं। यदि वे यह जिम्मेदारी न उठाएं तो परिवार को इसके लिए बाहर धन खर्च करना पड़ेगा। इसी तरह भोजन पकाना, बच्चों की निगरानी करना, घर का प्रबंधन संभालना और बीमार परिजनों को इलाज के लिए ले जाना जैसी सेवाओं का अपना एक स्पष्ट मूल्य होता है, भले ही इसके बदले कोई वेतन न मिलता हो या कोई बिल जारी न होता हो। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना दावों का निर्धारण न्यायसंगत होना चाहिए और इसमें उम्र को लेकर पनपने वाले सामाजिक पूर्वाग्रहों का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।

हादसे की पृष्ठभूमि और शारीरिक नुकसान

यह मामला 19 फरवरी 2019 की उस घटना से जुड़ा है, जब पूर्वी दिल्ली के पांडव नगर स्थित समसपुर बस स्टैंड पर बस में चढ़ते समय महिला सड़क पर गिर पड़ीं। उस समय उनकी उम्र 74 वर्ष थी। बस के पिछले पहियों के नीचे आ जाने से उनके दोनों पैर बुरी तरह कुचल गए थे।

READ ALSO  Illegal Detention of Students for 10 Days Without Due Process: Jharkhand HC Seeks Explanation from Chatra SP

चिकित्सीय प्रमाणपत्र के अनुसार, उनके दोनों निचले अंगों में 74 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता दर्ज की गई। चिकित्सकों को उनका बायां पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा, जबकि दाएं पैर की सभी उंगलियां भी सर्जरी कर हटानी पड़ी थीं। इसके बाद दिसंबर 2023 में न्यायाधिकरण ने 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 14.42 लाख रुपये का हर्जाना तय किया था, जिसे अब हाईकोर्ट ने बढ़ाकर 20,79,307 रुपये कर दिया है।

संशोधित वित्तीय आकलन

READ ALSO  SC Refuses to Allow Jungle Safari Project in Aravallis Without Clear Definition of Range

हाईकोर्ट ने दुर्घटना के समय दिल्ली में कुशल श्रमिकों के लिए तय न्यूनतम वेतन के आधार पर बुजुर्ग महिला की काल्पनिक मासिक आय 16,962 रुपये तय की। महिला के लंबे इलाज और बार-बार अस्पताल में भर्ती रहने की स्थिति को देखते हुए तीन महीने के आय नुकसान के तौर पर 50,886 रुपये मंजूर किए गए।

भविष्य की आमदनी के नुकसान के लिए अदालत ने उनकी व्यावहारिक दिव्यांगता का आकलन 50 प्रतिशत माना और उम्र के मुताबिक 5 का गुणक लागू करते हुए 5,08,860 रुपये तय किए। हालांकि, वृद्धावस्था के मद्देनजर भविष्य की आय वृद्धि की संभावनाओं को इसमें नहीं जोड़ा गया।

अदालत ने अन्य मदों में भी बढ़ोतरी की। सहायक शुल्क (अटेंडेंट चार्ज) को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये और दर्द व मानसिक प्रताड़ना के मद में दी जाने वाली राशि को 75,000 से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया। इसके अलावा नए कृत्रिम अंग के लिए 1.30 लाख रुपये और उसके रखरखाव के लिए 75,000 रुपये अलग से मंजूर किए गए।

भुगतान और बैंक जमा से जुड़े निर्देश

READ ALSO  Supreme Court Rejects Tamil Nadu's Plea Against CBI Probe into Kallakurichi Hooch Tragedy

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी कृत्रिम अंग और उसके रखरखाव की कुल 2.05 लाख रुपये की राशि छह सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण के पास अलग से जमा कराए। यह राशि तब जारी की जाएगी जब याचिकाकर्ता किसी प्रतिष्ठित विक्रेता से खरीद का मूल और सत्यापित बिल प्रस्तुत करेंगी। यह रकम ब्याज वाले फिक्स्ड डिपॉजिट में रखी जाएगी और उपयोग में न आने वाली राशि, मय ब्याज, बीमा कंपनी को वापस की जा सकेगी।

कुल बढ़ी हुई राशि 6,37,307 रुपये को याचिका दाखिल करने की तारीख से 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चार सप्ताह के अंदर न्यायाधिकरण में जमा कराना होगा। जमा होने के दो सप्ताह के भीतर 1,37,307 रुपये सीधे पीड़िता के खाते में भेज दिए जाएंगे।

शेष बढ़ी हुई राशि और उस पर अर्जित ब्याज को 30,000 रुपये की लगातार फिक्स्ड डिपॉजिट योजनाओं में तीन, छह और नौ महीने जैसी अवधियों के लिए जमा किया जाएगा। इन जमा राशियों पर मिलने वाला ब्याज समय-समय पर पीड़िता के बचत खाते में जमा होता रहेगा और परिपक्वता पर मूलधन सत्यापन के बाद जारी किया जाएगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles