‘इस्तांबुल ऑफिस’ मामले में कांग्रेस की मानहानि याचिका: दिल्ली हाईकोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को जारी किया समन

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को समन जारी किया है। यह कार्रवाई कांग्रेस पार्टी द्वारा दायर एक मानहानि याचिका पर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि गोस्वामी ने तुर्किये स्थित ‘इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर’ को कांग्रेस पार्टी का विदेशी कार्यालय बताकर झूठा दावा किया था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस मिनी पुष्करणा ने इस याचिका को वाद (suit) के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया। हालांकि, अदालत ने फिलहाल विवादित सामग्री को हटाने के लिए अंतरिम रोक (injunction) लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया कि संबंधित प्रसारण मई 2025 का है और अब इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होगी।

यह कानूनी विवाद 15 मई 2025 को प्रसारित हुए एक कार्यक्रम से जुड़ा है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि अर्नब गोस्वामी ने एक “मनगढ़ंत दावा” किया, जिसमें तुर्किये के एक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर (इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर) को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की विदेशी शाखा के रूप में पेश किया गया।

पार्टी ने अदालत में तर्क दिया कि यह दावा पहलगाम आतंकी हमले की संवेदनशील पृष्ठभूमि के दौरान किया गया था, जिसका उद्देश्य पार्टी की छवि खराब करने के लिए एक भ्रामक विमर्श खड़ा करना था। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने इस प्रसारण को गलत सूचना फैलाने के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा बताया। पार्टी ने जानकारी दी कि इसी तरह की एक शिकायत भारतीय युवा कांग्रेस के कानूनी सेल के प्रमुख श्रीकांत स्वरूप बी एन द्वारा बेंगलुरु में भी दर्ज कराई गई थी, जिसमें अर्नब गोस्वामी और बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय को नामजद किया गया था। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने उस विशेष जांच पर फिलहाल रोक लगा रखी है।

सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वकील ने सामग्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि यह “आपत्तिजनक कंटेंट” लगातार पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है।

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वकील ने अदालत से कहा, “लोग अभी भी इस बारे में बात कर रहे हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि यह जानकारी गलत है।” उन्होंने जोर दिया कि भले ही प्रसारण को समय बीत चुका है, लेकिन इंटरनेट पर इसकी मौजूदगी अभी भी जनता को गुमराह कर रही है।

वहीं, जस्टिस पुष्करणा ने अंतरिम रोक लगाने में हुई देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “देखते हैं। प्रसारण 15 मई 2025 का है… मैं आपको जल्द की एक तारीख दूंगी।” अदालत ने कोई भी दंडात्मक आदेश देने से पहले प्रतिवादी (गोस्वामी) का पक्ष सुनना जरूरी समझा।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को निर्देश दिया है कि वे अंतरिम राहत की याचिका पर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करें।

मानहानि की इस याचिका में रेखांकित किया गया है कि ये दावे भारत और तुर्किये के बीच तनावपूर्ण संबंधों के दौर में किए गए थे। याचिका के अनुसार, प्रसारण के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि कांग्रेस पार्टी का संबंध एक ऐसे देश से है जो पाकिस्तान का समर्थन करता है, जिससे पार्टी की छवि को गंभीर क्षति पहुंची है।

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अदालत अब 19 मई को इस मामले पर दोबारा सुनवाई करेगी, जहां अंतरिम रोक की अर्जी पर विचार किया जाएगा।

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