इंडिगो उड़ान रद्द मामले में दिल्ली हाईकोर्ट सख्त: रिफंड और मुआवज़े पर दो हफ्ते में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को इंडिगो एयरलाइंस को निर्देश दिया कि वह पिछले साल दिसंबर में सैकड़ों उड़ानों के रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को रिफंड और मुआवज़ा देने के संबंध में उठाए गए कदमों पर एक विस्तृत हलफनामा दो हफ्ते के भीतर दाखिल करे।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष इंडिगो के वकील ने बताया कि रद्द की गई उड़ानों के लिए रिफंड की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और नागर विमानन नियमों के अनुरूप यात्रियों को मुआवज़ा भी दिया जा रहा है।

वकील ने यह भी कहा कि जिन उड़ानों पर असर सबसे अधिक पड़ा, उनके यात्रियों को ₹10,000 के ट्रैवल वाउचर दिए जा रहे हैं, और यात्रियों के लिए एक विशेष वेबसाइट बनाई गई है, जहां वे मुआवज़े के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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इस पर अदालत ने कहा, “उत्तरदाता संख्या 3 दो सप्ताह के भीतर इस संबंध में हलफनामा दाखिल करे।”

यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसे अधिवक्ता अखिल राणा और उत्कर्ष शर्मा ने दाखिल किया था। याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र सरकार को निर्देशित किया जाए कि वह दिसंबर के पहले सप्ताह में इंडिगो द्वारा की गई सैकड़ों उड़ानों की रद्दीकरण से प्रभावित यात्रियों को उचित सहायता और रिफंड सुनिश्चित करे।

नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर 2025 के बीच कुल 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 में देरी हुई, जिससे देशभर के हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्री प्रभावित हुए।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि ₹10,000 का वाउचर पर्याप्त मुआवज़ा नहीं है, और इसकी सीमित वैधता यात्रियों के हितों के विरुद्ध है।

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इंडिगो के वकील ने बताया कि वाउचर 12 महीने के लिए वैध है, लेकिन पीठ ने सवाल किया कि यदि कोई यात्री एक साल के भीतर वाउचर का उपयोग नहीं कर पाया तो फिर क्या होगा? इस पर अदालत ने कहा कि इस बिंदु पर भी स्पष्टीकरण के साथ हलफनामा दाखिल किया जाए।

नागर विमानन मंत्रालय और DGCA की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि इस संकट के बाद अधिकारियों ने कई कठोर कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि इंडिगो के एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष को बर्खास्त किया गया, एयरलाइन पर ₹22 करोड़ का जुर्माना लगाया गया, और भविष्य में बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ₹50 करोड़ की बैंक गारंटी भी मांगी गई है। एयरलाइन के CEO और COO को भी चेतावनी दी गई है।

इसके अतिरिक्त, DGCA द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट अदालत को सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई।

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गौरतलब है कि यह संकट उस समय उत्पन्न हुआ जब एयरलाइन पायलटों के लिए नई फ्लाइट ड्यूटी नॉर्म्स लागू करने में पूरी तरह तैयार नहीं थी, जिससे भारी पैमाने पर पायलटों की कमी हो गई और उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी 2026 को तय की है और तब तक सभी पक्षों को अपने-अपने दस्तावेज़ दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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