ई-रिक्शा हादसे में बच्ची की मौत के बाद दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, सरकार और ट्रैफिक पुलिस से मांगा जवाब


दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राजधानी में ई-रिक्शा के संचालन को नियमित करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर दिल्ली सरकार, ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग और नगर निगम (MCD) से जवाब तलब किया है।

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कार्या की खंडपीठ ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे शपथपत्र के माध्यम से यह बताएं कि ई-रिक्शा संचालन को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को तय की है।

यह याचिका मनीष पराशर नामक व्यक्ति ने दायर की है, जिनकी 8 वर्षीय बेटी की पिछले वर्ष उस समय मृत्यु हो गई थी जब वह स्कूल जाते समय एक तेज रफ्तार, बीमा रहित और निषिद्ध मार्ग पर चल रहे ई-रिक्शा से हादसे का शिकार हुई।
याचिका में बताया गया कि रिक्शा अनियंत्रित होकर पलट गया और बच्ची उसकी चपेट में आ गई।

एडवोकेट गौरव आर्य और नवीन बमल के माध्यम से दायर याचिका में सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि दिल्ली में ई-रिक्शाओं का “बेकाबू प्रसार एक गंभीर संकट” बन गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 20 अगस्त 2025 के बीच ई-रिक्शा से जुड़े 108 हादसे हुए, जिनमें 26 लोगों की मौत और 130 लोग घायल हुए — यानी हर महीने औसतन तीन मौतें।

दिल्ली सरकार की अधिसूचना के अनुसार 236 सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन और पार्किंग पर रोक है, लेकिन याचिकाकर्ता का कहना है कि इन नियमों का पालन जमीन पर नहीं हो रहा है। अधिकांश ई-रिक्शा बिना पंजीकरण, वैध ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट और बीमा के चल रहे हैं।

याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि वह संबंधित विभागों को निर्देश दे:

  • ई-रिक्शा सेवा योजना और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों को सख्ती से लागू करें
  • प्रत्येक ई-रिक्शा का पंजीकरण, फिटनेस जांच (हर 3 साल में), वैध ड्राइविंग लाइसेंस सुनिश्चित किया जाए
  • ई-रिक्शा में ड्राइवर को छोड़कर अधिकतम 4 सवारियों की सीमा लागू की जाए
  • बीमा और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच अनिवार्य की जाए
  • बिना वैध कागजों के चल रहे ई-रिक्शा को जब्त और सीज किया जाए
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याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से अपील की कि स्कूल जाने वाले बच्चों सहित आम जनता की सुरक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है कि इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि और हादसे रोके जा सकें।

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