नितीश कटारा हत्याकांड: फर्लो पर रिहाई की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नितीश कटारा हत्याकांड में दोषी विकास यादव की फर्लो (अस्थायी रिहाई) याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। विकास, जो 25 साल की सजा काट रहा है, ने हाल ही में शादी के बाद सामाजिक संबंध बनाए रखने के लिए 21 दिन की फर्लो की मांग की थी।

न्यायमूर्ति रविंदर दुजाना की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि आदेश बाद में पारित किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने की छूट भी दी।

विकास यादव, उत्तर प्रदेश के पूर्व राजनेता डी.पी. यादव का बेटा है। वह 2002 में हुए नितीश कटारा अपहरण और हत्या के मामले में दोषी है। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2016 में उसे और उसके चचेरे भाई विशाल यादव को 25 साल की सजा सुनाई थी, जिसमें किसी भी प्रकार की रियायत (remission) की अनुमति नहीं थी। तीसरे सह-आरोपी सुखदेव पहलवान को 20 साल की सजा दी गई थी।

हत्या का कारण नितीश कटारा का भाटी यादव (विकास की बहन) के साथ कथित प्रेम संबंध बताया गया था, जिससे यादव परिवार जातिगत भेद के चलते असहमत था।

वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत को बताया कि यह विकास यादव की पहली फर्लो याचिका है और उसने दिल्ली जेल नियमों के तहत सभी शर्तें पूरी की हैं। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन ने याचिका को केवल अपराध की प्रकृति और सजा की अवधि के आधार पर खारिज कर दिया, जो नियमों के अनुरूप नहीं है।

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जेल प्रशासन ने फर्लो देने से इनकार करते हुए कहा कि विकास का आचरण “असंतोषजनक” रहा है। साथ ही पीड़ित परिवार द्वारा जताई गई आशंका का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि विकास जेल से बाहर आने पर देश छोड़ सकता है, कानून-व्यवस्था को बाधित कर सकता है और पीड़ित परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है।

अदालत ने पहले ही दिल्ली सरकार, जेल प्रशासन, पीड़िता की मां नीलम कटारा और गवाह अजय कटारा को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा था।

सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने विकास की अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका तकनीकी आधारों पर खारिज कर दी थी। हालांकि, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उसकी मां की बीमारी के चलते उसे कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत दी थी।

सह-आरोपी सुखदेव पहलवान की सजा जुलाई 2025 में पूरी हो गई थी और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी रिहाई का आदेश दिया था। लेकिन रिहाई के कुछ समय बाद उसकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले विकास और विशाल की उम्रकैद को बिना रियायत के 30 साल में परिवर्तित किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बाद में 25 साल कर दिया।

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फर्लो एक अस्थायी रिहाई होती है, जो लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को सामाजिक संबंध बनाए रखने के लिए दी जाती है। यह न तो पूरी सजा में छूट है और न ही आपातकालीन रिहाई (जैसे पैरोल)। फर्लो पात्रता और व्यवहार के आधार पर दी जाती है।

अब अदालत यह तय करेगी कि विकास यादव को फर्लो का लाभ दिया जाए या नहीं।

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