दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में सरेंडर करने के अपने पुराने आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी व्यक्ति को केवल उसके पेशे या पृष्ठभूमि के आधार पर विशेष रियायत नहीं दी जा सकती और कानून की अवहेलना को प्रोत्साहन नहीं मिलना चाहिए।
यह मामला यादव की उस सजा से जुड़ा है जो उन्हें मुरली प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. द्वारा दर्ज चेक बाउंस मामलों में दी गई थी। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट अदालत ने उन्हें छह महीने की सजा सुनाई थी, जिसे 2019 में सत्र न्यायालय ने बरकरार रखा। इसके खिलाफ यादव और उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।
जून 2024 में हाईकोर्ट ने अस्थायी रूप से सजा पर रोक लगाई थी, बशर्ते कि यादव “ईमानदारी से समझौते के प्रयास” करें। लेकिन अदालत ने बाद में पाया कि उन्होंने बार-बार भुगतान की समयसीमा और प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया।
2 फरवरी 2026 को अदालत ने यादव को 4 फरवरी को शाम 4 बजे तक तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए पेशी से चूक की कि वे पैसे का इंतज़ाम कर रहे थे और दिल्ली देर से पहुंचे।
गुरुवार को न्यायमूर्ति स्वराणा कांता शर्मा की पीठ ने यादव की इस चूक पर कड़ी आपत्ति जताई और उनकी याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने सरेंडर आदेश को वापस लेने की अपील की थी।
“कानून उसकी अनुपालना पर इनाम देता है, अवमानना पर नहीं,” अदालत ने कहा।
“यह अदालत किसी भी व्यक्ति के लिए केवल इस कारण से विशेष परिस्थितियाँ नहीं बना सकती कि वह किसी खास पृष्ठभूमि या उद्योग से आता है… सहानुभूति जरूरी हो सकती है, लेकिन उसका असीम विस्तार उचित नहीं जब बार-बार आदेशों की अवहेलना हो रही हो,” – न्यायमूर्ति शर्मा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आदेशों का पालन न करने पर अदालत बार-बार राहत देती है, तो यह न्यायिक आदेशों की गंभीरता को कमजोर करता है।
अदालत के अनुसार, यादव को प्रत्येक मामले में ₹1.35 करोड़ का भुगतान करना था। अक्टूबर 2025 तक ₹75 लाख के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए थे, लेकिन ₹9 करोड़ अब भी बकाया हैं। अदालत ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा रकम को शिकायतकर्ता को जारी करने का आदेश दिया।
यादव के वकील ने दलील दी कि यह राशि एक फिल्म निर्माण के लिए ली गई थी, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई, जिससे नुकसान हुआ। गुरुवार को यादव व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश हुए और ₹25 लाख का डिमांड ड्राफ्ट देने की पेशकश की, साथ ही भुगतान की समयसीमा पर सहमति जताई। लेकिन अदालत ने सरेंडर आदेश में कोई बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया।
अब अदालत ने यादव को स्पष्ट रूप से “आज ही तिहाड़ जेल अधीक्षक के समक्ष आत्मसमर्पण” करने का निर्देश दिया है और किसी भी तरह की राहत से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि उनके वकील द्वारा दी गई दलील में कोई दम नहीं है।

