राजपाल यादव को सरेंडर के लिए और वक्त देने से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार; अदालत ने कहा– बार-बार आदेशों का उल्लंघन किया गया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामलों में सज़ा के सिलसिले में जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने के लिए और समय देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यादव बार-बार अदालत के आदेशों और वादों का उल्लंघन करते रहे हैं और अब किसी प्रकार की राहत का हकदार नहीं हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने चेक बाउंस मामलों में सज़ा के चलते सरेंडर की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की थी।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने स्पष्ट कहा कि अदालत द्वारा पहले ही दो दिन की मोहलत दी जा चुकी है और अब और राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।

“मैंने उस दिन ही यह दलीलें खारिज कर दी थीं और आपको दो दिन का समय दे दिया था। आज आपको चार बजे तक सरेंडर करना ही होगा,” अदालत ने कहा।

यादव के वकील ने अदालत से “दया की अपील” करते हुए एक दिन की और मोहलत मांगी ताकि ₹50 लाख की भुगतान राशि जमा की जा सके। इस पर न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा:

READ ALSO  हाईकोर्ट का अहम फैसला: दूसरी पत्नी से पैदा संतान को है अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार

“उन्होंने ऐसा कम से कम 15-20 बार किया है… उनके आचरण का उल्लेख पिछले आदेश में किया गया है। उन्होंने किसी भी आदेश या वचन का पालन नहीं किया… अब किसी प्रकार की और रियायत का कोई आधार नहीं है।”

2 फरवरी को पारित आदेश में, हाईकोर्ट ने यादव को 7 फरवरी शाम 4 बजे तक सरेंडर करने का निर्देश दिया था और उनके आचरण की आलोचना करते हुए कहा था कि उन्होंने कई बार अदालत को दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन किया।

READ ALSO  जागरूकता की कमी के आधार पर लोक अदालत के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती: केरल हाईकोर्ट

मामले में शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को ₹1.35 करोड़ की भुगतान राशि सात मामलों में प्रत्येक में देनी थी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा ₹75 लाख के दो डिमांड ड्राफ्ट शिकायतकर्ता को दे दिए जाएं।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी भी ₹9 करोड़ की राशि देय है।

राजपाल यादव और उनकी पत्नी ने 2019 के उस सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा अप्रैल 2018 में दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था।

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभिनेता को छह महीने की सज़ा सुनाई थी। उस समय, यादव के वकील ने तर्क दिया था कि यह लेन-देन फिल्म निर्माण के लिए किया गया था, लेकिन फिल्म फ्लॉप हो जाने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

READ ALSO  धोखाधड़ी मामले में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

जून 2024 में, हाईकोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था, इस शर्त पर कि वह “ईमानदारी से सुलह के प्रयास” करेंगे।

लेकिन कई बार दी गई मोहलतों और अदालत की चेतावनियों के बावजूद राशि का भुगतान न करने पर अदालत ने अब सख्त रुख अपनाते हुए यादव को और समय देने से इनकार कर दिया है। अब उन्हें पूर्व आदेश के अनुसार तुरंत आत्मसमर्पण करना होगा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles