दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उनकी बहू प्रिया कपूर की उस याचिका पर जारी किया गया है जिसमें रानी कपूर पर अदालत में झूठा हलफनामा दाखिल करने का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा की एकल पीठ ने प्रिया कपूर की दो अर्जियों पर रानी कपूर से जवाब मांगा है—एक में उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) के तहत झूठी गवाही (perjury) की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है, और दूसरी में रानी कपूर द्वारा दायर मूल सिविल मुकदमे को ही खारिज करने की प्रार्थना की गई है।
प्रिया कपूर ने कहा है कि रानी कपूर ने शपथ पर “जानबूझकर और झूठा बयान” दिया कि उन्होंने आरके फैमिली ट्रस्ट डीड पर न तो हस्ताक्षर किए और न ही उसके दस्तावेज़ पढ़े। याचिका में दावा किया गया है कि इस बात के “अखंडनीय दस्तावेज़” मौजूद हैं—जैसे हलफनामे और तस्वीरें—जो रानी कपूर के दावे को गलत सिद्ध करते हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रानी कपूर ने अपने मुकदमे में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया, अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया, और यह “न्यायालय से धोखाधड़ी” के समान है।
80 वर्षीय रानी कपूर ने अपनी बहू प्रिया कपूर और अन्य लोगों के खिलाफ सिविल सूट दायर किया है जिसमें अक्टूबर 2017 में बनाए गए “आरके फैमिली ट्रस्ट” को “जालसाजी, धोखाधड़ी और कपट” पर आधारित बताते हुए “शून्य और अमान्य” घोषित करने की मांग की गई है।
रानी कपूर ने दावा किया है कि उनके दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की वह एकमात्र लाभार्थी थीं, लेकिन उनके साथ “सुनियोजित धोखाधड़ी” कर उनकी संपत्ति एक “फर्जी ट्रस्ट” में ट्रांसफर कर दी गई, जिसकी जानकारी तक उन्हें नहीं दी गई।
उनका कहना है कि उनके बेटे संजय कपूर ने कभी उन्हें यह नहीं बताया कि उनकी संपत्ति ट्रस्ट को हस्तांतरित की जा चुकी है, और ट्रस्ट की प्रति भी कभी नहीं दी।
इस मुकदमे के अतिरिक्त, संजय कपूर और अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दो बच्चों द्वारा भी हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उनके पिता की वसीयत को चुनौती दी गई है। उन्होंने अपनी सौतेली मां प्रिया कपूर पर “लालच” का आरोप लगाया है।
बता दें कि संजय कपूर का निधन जून 2025 में इंग्लैंड में एक पोलो मैच के दौरान अचानक हृदय गति रुक जाने से हुआ था।
10 फरवरी की सुनवाई में, न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने पूरे परिवार से “शांति से समाधान” निकालने की अपील की थी। उन्होंने कहा था, “ईश्वर ने आपको संपत्ति का वरदान दिया है, उसे अभिशाप मत बनने दीजिए।” उन्होंने यह भी कहा था कि “गंदे कपड़े अदालत में धोने की जरूरत नहीं” और समाधान के लिए “दोनों पक्षों को प्रयास करना चाहिए।”
यह मामला अब मार्च में अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

