दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता डी. के. शिवकुमार द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ED) की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अगली सुनवाई 10 मार्च को तय की।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर दूडेजा की पीठ ने शिवकुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा समय मांगने पर सुनवाई टाल दी। पीठ ने संक्षेप में कहा, “सूचीबद्ध करें 10 मार्च को।”
शिवकुमार ने 2022 में दाखिल याचिका में प्रवर्तन मामला सूचना रिकॉर्ड (ECIR) को चुनौती दी थी, जो ईडी ने 2020 में दर्ज किया था। यह ECIR बेंगलुरु में सीबीआई द्वारा 3 अक्टूबर 2020 को दर्ज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर पर आधारित है। इसमें आरोप है कि 1 अप्रैल 2013 से 30 अप्रैल 2018 की अवधि के दौरान शिवकुमार और उनके परिवार ने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।
याचिका में कहा गया है कि ईडी पहले ही 2018 में इसी तरह के आरोपों की जांच कर चुकी है, ऐसे में दोबारा उसी मामले की जांच करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग और द्वितीय दंड का मामला है।
शिवकुमार की ओर से वकील मयंक जैन, परमत्मा सिंह और मधुर जैन ने कहा कि यह नई जांच दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है।
वहीं, ईडी ने अपने जवाब में पुनः जांच के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दोनों ECIR अलग-अलग तथ्यों और अपराधों पर आधारित हैं। पहले ECIR में 8.59 करोड़ रुपये की कथित अपराध आय दर्ज है और यह आईपीसी की धारा 120B (षड्यंत्र) से संबंधित है, जबकि वर्तमान ECIR में 74.93 करोड़ रुपये की संपत्ति की बात है और यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुआ है।
ईडी ने तर्क दिया है कि जांच के इस प्रारंभिक चरण में double jeopardy (एक अपराध के लिए दो बार सजा) का दावा समय से पहले है और इस प्रकार की याचिका में अंतरिम राहत देना उचित नहीं है।
मई 2, 2023 को कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया था कि ईडी की ओर से कहा गया है कि शिवकुमार के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने कहा था कि ईडी अपने इस रुख से “बांध दी गई” मानी जाएगी।

