दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव की याचिका पर CBI से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने IRCTC घोटाला मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति स्वराणा कांता शर्मा ने तेजस्वी की मुख्य याचिका और स्थगन याचिका पर CBI को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी के लिए सूचीबद्ध की। इसी दिन लालू प्रसाद यादव की समान याचिका पर भी सुनवाई होगी।
13 अक्टूबर 2025 को विशेष सीबीआई अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC की धारा 420), आपराधिक साजिश (IPC धारा 120बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित 13(1)(d)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए थे।
कोर्ट ने कहा था कि सभी 14 आरोपियों के खिलाफ “संयुक्त रूप से” आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और लोक सेवक द्वारा पद के दुरुपयोग के आरोप बनते हैं।
इन धाराओं के तहत दोषसिद्धि होने पर अधिकतम 10 वर्ष की सजा (PC एक्ट के तहत) और 7 वर्ष की सजा (धोखाधड़ी के लिए) हो सकती है।
यह मामला रेल मंत्री रहते लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल का है, जब IRCTC के रांची और पुरी स्थित होटलों के संचालन अनुबंधों के आवंटन में कथित रूप से गड़बड़ी हुई थी। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर एक निजी कंपनी को ठेका दिया गया, और बदले में लालू यादव के परिवार से जुड़ी कंपनियों को प्राइम लोकेशन पर जमीन दी गई।
मामले में लालू परिवार के अलावा पूर्व IRCTC अधिकारी प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया, विनोद कुमार अस्ताना के खिलाफ भी भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं में आरोप तय किए गए हैं।
निजी फर्म लारा प्रोजेक्ट्स LLP, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ भी आरोप तय किए गए हैं।
तेजस्वी यादव और लालू यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि आरोपों में दम नहीं है और प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
अब यह मामला 14 जनवरी को फिर से हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए आएगा, जिसमें दोनों नेताओं की याचिकाओं पर बहस होगी।

