सबरीमला प्रसादम आय में अनियमितताएँ: केरल हाईकोर्ट ने TDB में ‘गंभीर प्रणालीगत खामियाँ’ पाईं, पारदर्शी वित्तीय ढाँचा बनाने का निर्देश

केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला मंदिर में पवित्र प्रसादम की बिक्री से संबंधित आय के प्रबंधन में त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) की प्रक्रियाओं, निगरानी, स्टॉक लेखांकन और वित्तीय नियंत्रण में “गहरी जड़ें जमाए प्रणालीगत खामियाँ” पाई हैं और बोर्ड को पारदर्शी व जवाबदेह तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन वी और न्यायमूर्ति के वी जयकुमार की खंडपीठ ने यह टिप्पणी सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) की विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद की, जो अडिया सिष्टम घी की बिक्री में कथित धन के दुरुपयोग की जांच कर रही है।

SIT ने अदालत को बताया कि 33 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें मंदिर के विशेष अधिकारी और लगभग 30 काउंटर कर्मचारी शामिल हैं।

अदालत ने SIT को जांच जारी रखने और 45 दिनों के भीतर इसे पूरा करने का प्रयास करने का निर्देश दिया।

रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद खंडपीठ ने कहा कि अनियमितताएँ अलग-थलग घटनाएँ नहीं हैं, बल्कि संस्थागत कमियों की ओर संकेत करती हैं।

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“…हमें कई ऐसी विसंगतियाँ दिखाई देती हैं जो गहरी जड़ें जमाए प्रणालीगत खामियों का लक्षण हैं। हमारे विचार में इन खामियों को आपात आधार पर दूर किया जाना आवश्यक है।”

अदालत ने कहा कि यह “अलग-थलग अनियमितताएँ नहीं बल्कि प्रक्रिया, निगरानी, स्टॉक लेखांकन और वित्तीय नियंत्रण में प्रणालीगत कमियों” को दर्शाती हैं।

रिकॉर्ड के रख-रखाव और प्रसादम बिक्री से हुई आय के लेखांकन को लेकर अदालत ने “लापरवाह और ढीले रवैये” पर आश्चर्य व्यक्त किया और स्थिति को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया।

खंडपीठ ने निर्देश दिया कि अप्पम, अडिया सिष्टम घी, अरवना, विभूति, कुमकुम सहित सभी प्रसादम की बिक्री से प्राप्त आय को पूर्णतः जवाबदेह और पारदर्शी वित्तीय व प्रशासनिक ढाँचे के तहत लाया जाए।

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अदालत ने एक मानकीकृत प्रक्रिया विकसित करने का निर्देश दिया, जिसमें शामिल हों:

  • भक्तों द्वारा प्रतिदिन और मौसमी आधार पर दिए गए प्रसाद सामग्री की मात्रा का रिकॉर्ड
  • भंडारण और स्टॉक की निगरानी
  • बिक्री का दस्तावेजीकरण
  • प्राप्त राशि का विधिवत जमा और लेखांकन

अदालत ने कहा कि भक्तों की ओर से दिए गए प्रसाद को “पवित्रता और न्यासीय जिम्मेदारी” के साथ संभाला जाना चाहिए और बोर्ड को मिलने वाली वैध आय की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

अदालत ने कहा कि वर्तमान में बोर्ड के पास अपनी प्रशासनिक और लेखा प्रणाली को सुधारने के लिए आवश्यक संस्थागत क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव है।

“हमने जानबूझकर पेशेवर सहायता की आवश्यकता पर बल दिया है, क्योंकि हमारे समक्ष रखी गई सामग्री से स्पष्ट है कि बोर्ड के पास अभी वह संस्थागत क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रणालीगत ढाँचा नहीं है, जिससे वह अपने प्रशासनिक और लेखा तंत्र को स्वयं व्यवस्थित कर सके।”

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बोर्ड को निर्देश दिया गया है कि वह एक विस्तृत, समयबद्ध कार्ययोजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।

यह मामला अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दायर की गई याचिका से उत्पन्न हुआ, जो TDB के मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट पर आधारित थी। इस रिपोर्ट में मंडलम–मकरविलक्कु तीर्थ सीजन के दौरान अडिया सिष्टम घी की बिक्री से प्राप्त आय में अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया था।

13 जनवरी को अदालत ने कथित धन के दुरुपयोग पर “स्तब्ध और अत्यंत व्यथित” होने की टिप्पणी करते हुए सतर्कता जांच का आदेश दिया था।

मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी।

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