IRCTC घोटाला मामला: राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI से मांगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की उस याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जवाब तलब किया है, जिसमें उन्होंने IRCTC घोटाले में अपने खिलाफ आरोप तय किए जाने को चुनौती दी है।

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने राबड़ी देवी की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को तय की है। इसी दिन उनके पति लालू प्रसाद यादव और पुत्र तेजस्वी यादव की समान याचिकाओं पर भी सुनवाई होनी है।

दिल्ली की विशेष अदालत ने 13 अक्टूबर 2025 को लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य 11 आरोपियों पर IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (आपराधिक साजिश) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d)(ii) व (iii) के तहत आरोप तय किए थे।

राबड़ी देवी की याचिका में दावा किया गया है कि विशेष अदालत ने केवल “अनुमान” के आधार पर उनके खिलाफ आरोप तय किए, जबकि उनके खिलाफ किसी भी तरह की संलिप्तता का कोई साक्ष्य नहीं है। याचिका में कहा गया, “यह रिकॉर्ड का हिस्सा है कि ना तो A-1 (लालू यादव) और ना ही उनके परिवार का कोई सदस्य, जिसमें याचिकाकर्ता (राबड़ी देवी) शामिल हैं, होटल टेंडर प्रक्रिया में शामिल था।”

राबड़ी देवी ने यह भी तर्क दिया कि विशेष अदालत ने यह मानकर आरोप तय कर दिए कि चूंकि लालू यादव रेल मंत्री थे, इसलिए उन्होंने IRCTC के अधिकारियों को टेंडर प्रक्रिया प्रभावित करने के लिए प्रभावित किया होगा, जबकि यह केवल एक संभावना है, जिसे केवल ट्रायल में ही परखा जा सकता है।

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CBI की चार्जशीट के अनुसार, वर्ष 2004 से 2014 के बीच लालू प्रसाद यादव और अन्य ने आपराधिक साजिश रची, जिसके तहत इंडियन रेलवे के BNR होटल्स (पुरी और रांची स्थित) को IRCTC को स्थानांतरित किया गया और फिर उन्हें पटना स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को लीज़ पर दे दिया गया।

एजेंसी का आरोप है कि यह लीज़ प्रक्रिया पूर्व नियोजित और गड़बड़ियों से भरी थी, जिसे तत्कालीन IRCTC प्रबंध निदेशक पी.के. गोयल की निगरानी में संचालित किया गया। इसमें सरला गुप्ता (सुजाता होटल्स की मालकिन और आरजेडी सांसद प्रेम चंद गुप्ता की पत्नी), तेजस्वी यादव, और अन्य आरोपियों की संलिप्तता बताई गई है।

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विशेष अदालत ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, विजय कोचर, विनय कोचर और LARA प्रोजेक्ट्स एलएलपी के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d)(ii) व (iii) के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया था।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम सजा 10 वर्ष की है, जबकि IPC की धारा 420 के तहत अधिकतम सजा 7 वर्ष की हो सकती है।

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अब इस मामले पर 19 जनवरी को अगली सुनवाई होगी, जिसमें लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की याचिकाएं भी विचाराधीन हैं।

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