नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026: दिल्ली की सभी जिला अदालतों के वकील 27 अक्टूबर को न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे। दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ कथित दुर्व्यवहार और धमकी देने की घटना के विरोध में यह फैसला लिया है। कमेटी ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को निष्पक्ष जांच पूरी होने तक तत्काल निलंबित करने की मांग भी की है।
यह विवाद अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की घटना से जुड़ा है। कमेटी का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की। इसके बाद जब वकील पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उनके साथ कथित तौर पर धमकी भरा व्यवहार किया गया।
26 अक्टूबर को जारी प्रस्ताव में कमेटी ने कहा कि इन घटनाओं से वकीलों की गरिमा, सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
वकील के सिर में गंभीर चोट लगने से जुड़ा है मामला
कमेटी के अनुसार, पूरे विवाद की शुरुआत शाहदरा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या 0248/2026 से हुई। यह एफआईआर उस घटना से संबंधित है जिसमें अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी।
इस मामले में अधिवक्ता अमूल्य रतन शिकायतकर्ता हैं। कमेटी ने कहा कि चोट की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों से तत्काल, प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा थी।
23 अक्टूबर की शाम कई अधिवक्ता शाहदरा पुलिस स्टेशन पहुंचे और घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
कमेटी के मुताबिक, उस समय एसीपी और थाना प्रभारी ने वकीलों को भरोसा दिलाया था कि मामले में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
हालांकि, 24 अक्टूबर को जब अधिवक्ता दोबारा पुलिस स्टेशन पहुंचे तो उन्हें पता चला कि संबंधित आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया था और कथित तौर पर छोड़ दिया गया था।
कमेटी ने कहा कि इस जानकारी से वकीलों में गंभीर नाराजगी पैदा हुई, खासकर इसलिए क्योंकि उनके साथी अधिवक्ता को गंभीर चोट लगी थी और पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था।
एसीपी पर रिवॉल्वर दिखाकर वकीलों को धमकाने का आरोप
प्रस्ताव में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
कमेटी के अनुसार, जब अधिवक्ता मामले में पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताने और जवाबदेही तय करने की मांग लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर अपना रिवॉल्वर दिखाया और वहां मौजूद वकीलों को धमकाया।
कमेटी ने इस घटना को बेहद गंभीर बताया है। उसका कहना है कि अधिवक्ता कानूनी तरीके से कार्रवाई की मांग करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें कथित तौर पर धमकी और डराने-धमकाने वाले व्यवहार का सामना करना पड़ा।
कमेटी ने हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों द्वारा वकीलों के साथ कथित मनमाने और कठोर व्यवहार की घटनाओं पर भी चिंता जताई।
एसीपी और SHO के तत्काल निलंबन की मांग
26 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित आपात बैठक में को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने पूरे घटनाक्रम पर विचार किया।
बैठक में सर्वसम्मति से एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित थाना प्रभारी को निष्पक्ष जांच होने तक तत्काल निलंबित करने की मांग करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
कमेटी ने कहा कि न्याय पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने वाले अधिवक्ताओं को धमकी या टकराव का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।
उसने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने और उचित कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई।
27 अक्टूबर को सभी जिला अदालतों में न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे वकील
पुलिस के कथित मनमाने व्यवहार के विरोध में को-ऑर्डिनेशन कमेटी ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि 27 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की सभी जिला अदालतों के अधिवक्ता न्यायिक कार्य में हिस्सा नहीं लेंगे।
कमेटी ने इस फैसले को वकीलों की गरिमा, सुरक्षा और उनके वैध पेशेवर अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक विरोध बताया है।
प्रस्ताव में कहा गया कि यह निर्णय बार के सदस्यों के साथ एकजुटता दिखाने और वकीलों की सुरक्षा तथा सम्मान को प्रभावित करने वाले व्यवहार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के लिए लिया गया है।
कमेटी ने दिल्ली के सभी अधिवक्ताओं से एकता और आपसी सहयोग बनाए रखने की अपील की है। साथ ही कहा कि कानून का शासन बनाए रखने, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में वकीलों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
