मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक चुनाव याचिका दाखिल कर दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह की जीत को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधायक ने अपने चुनावी हलफनामे में 1991 के एक आपराधिक मामले की जानकारी छिपाई थी। इस आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करने की मांग की गई है। मामले पर हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।
यह याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, घनश्याम सिंह ने 30 जुलाई को हुए उपचुनाव के दौरान नामांकन पत्र के साथ प्रस्तुत हलफनामे में दो आपराधिक मामलों का ब्योरा तो दर्ज किया, लेकिन 1991 के एक मामले का उल्लेख नहीं किया। याचिका में दलील दी गई है कि आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्य छिपाने के कारण उनका चुनाव रद्द किया जाना चाहिए।
राजीव गांधी हत्याकांड के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है पुराना मामला
याचिका के मुताबिक, यह मामला 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के विरोध में दतिया में आयोजित प्रदर्शन और चक्काजाम से संबंधित है। उस समय पुलिस ने इस संबंध में घनश्याम सिंह सहित कुल 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विधायक ने उपचुनाव के नामांकन के दौरान इस मामले की जानकारी साझा नहीं की और जानबूझकर तथ्य छिपाए।
विधायक ने आरोपों को बताया राजनीतिक षड्यंत्र
दूसरी तरफ, दतिया में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए विधायक घनश्याम सिंह ने इन आरोपों को विरोधियों का षड्यंत्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जिस मामले की बात की जा रही है, वह करीब 35 साल पुराना है। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस संबंध में अदालत या पुलिस से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और न ही उन्होंने याचिका की प्रति देखी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह इस प्रकार के दबाव या हथकंडों से डरने वाले नहीं हैं।
उपचुनाव के नतीजे और दतिया का सियासी समीकरण
दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 7,000 से अधिक वोटों से पराजित किया था। इस मुकाबले में कुल 20 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिनमें आजाद समाज पार्टी के दामोदर सिंह यादव भी शामिल थे।
यह उपचुनाव पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के कारण कराया गया था। भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,700 से अधिक मतों से हराया था। इसके बाद, इसी वर्ष अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में राजेंद्र भारती को तीन साल के कारावास की सजा सुनाई, जिसके चलते उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई। इस उपचुनाव में भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया था, जिसके विरोध में उनके समर्थकों ने क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किए थे।

