केवल दहेज के लिए दबाव बनाना,सुसाइड के लिए उकसाना नही: इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी शख्स के विरुद्ध आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की धारा 306 आईपीसी के तहत मुकदमा चलाने के लिए यह देखना आवश्यक है कि आरोपी द्वारा किया गए कार्यों में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने वाले तत्व है या नही। जैसा कि आईपीसी की धारा 107 में वर्णित है। एकल पीठ ने कहा कि दहेज मांगने के लिए दवाब डालने से आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने का अपराध नही बनता है। कोर्ट ने धारा 306 आईपीसी के तहत दर्ज चार्जशीट को खारिज करते हुए दहेज उत्पीड़न की धारा में मुकदमा चलाने का सीजेएम मेरठ को आदेश दिया है।

जस्टिस पंकज भाटिया ने मेरठ निवासी आनंद सिंह एंव अन्य लोगों की याचिका पर यह निर्णय दिया। याचिकाकर्ता और उसके परिजनों के विरुद्ध मेरठ के प्रतापपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि उन्होंने शादी के लिए पीड़िता अनु और उसके परिवार वालों पर दवाब डाला और मोटी रकम की डिमांड कर रहे थे। जिसकी वजह से अनु ने शादी से 15 दिन पहले खुद को आग लगा ली। जिसके बाद सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।

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पुलिस ने इस मामले में सभी आरोपियों के खिलाफ सुसाइड के लिए उकसाने की धारा में सीजेएम मेरठ की कोर्ट में आरोपपत्र पेश किया। जिसे हाई कोर्ट से यह कहते हुए चुनौती दी गई कि याची व उसके परिवार वालों पर दहेज मांगे का आरोप अगर सही भी मान लिया जाय तब भी उन पर खुदकुशी के लिए उकसाने का कोई मामला नही बनता है। चूंकि कोई भी गवाह के बयान में ऐसा तथ्य नही आया है। जिससे ज्ञात हो कि आरोपियों ने पीड़िता को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया था। या कोई साजिश की थी। 

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