नागरिको की अभिव्यक्ति की आजादी को आपराधिक मामले थोपकर नही दबा सकते: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश मे किसी भी नागरिक को अभिव्यक्ति की आजादी को आपराधिक मामले थोपकर नही दबा सकते हैं। यह कहते हुए पीठ ने पत्रकार पैट्रिशिया मुखीम के खिलाफ दर्ज एफआईआर रदद कर दी है।

द शिलांग टाइम्स की संपादक और वरिष्ठ पत्रकार पैट्रिशिया पर फेसबुक पोस्ट से साम्प्रादायिक दंगे फैलाने के आरोप हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने कहा कि मुखीम ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट में मेघालय में रहने वाले गैर आदिवासियों की सुरक्षा और उनकी समानता के लिए जो तर्क दिए हैं। उसे भड़काऊ भाषण नही माना जा सकता है।

मुखीम कि फेसबुक अकाउंट पोस्ट को भड़काऊ भाषण के दायरे में नही रखा जा सकता है। आगे जस्टिस राव ने कहा कि सरकार के कामकाज से नाखुशी जाहिर करने को विभिन्न समुदायों के मध्य नफरत को बढ़ावा देने के प्रयास के रुप में ब्रांड नही बनाया जा सकता है। पीठ ने कहा कि भारत एक बहुसांस्कृतिक समाज है। जहां स्वतंत्रता का वादा संविधान की प्रस्तावना में दिया गया।

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