छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: अवैध संबंधों के चलते पति और प्रेमिका ने दी पत्नी की हत्या की सुपारी, कोर्ट ने 5 आरोपियों की उम्रकैद रखी बरकरार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सनसनीखेज हत्याकांड में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति, उसकी प्रेमिका और तीन सुपारी किलर (Contract Killers) की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला पत्नी की सुनियोजित हत्या से जुड़ा है, जिसे पति ने अपने अवैध संबंधों के रास्ते से हटाने के लिए अंजाम दिया था।

जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली सभी आपराधिक अपीलों को खारिज कर दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि भले ही इस मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी (Eyewitness) नहीं था, लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) आपराधिक साजिश को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतका अन्नू शुक्ला का विवाह वर्ष 2012 में आरोपी अपेंद्र शुक्ला के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद ही अन्नू को पता चला कि उसके पति का सह-आरोपी कु. मालती के साथ अवैध संबंध है। जब भी अन्नू इसका विरोध करती, तो अपेंद्र उसके साथ मारपीट और प्रताड़ना करता था। आरोप है कि मालती अक्सर उनके घर आती थी और अन्नू के साथ “नौकरानी” जैसा व्यवहार करती थी।

20 जनवरी 2015 को अन्नू शुक्ला अपने ससुराल (ग्राम मेंड्रा) में मृत पाई गई। उसके शरीर पर चाकू के कई गहरे घाव थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या अपेंद्र और मालती द्वारा रची गई एक साजिश थी। उन्होंने अन्नू को रास्ते से हटाने के लिए रजत उर्फ ​​टिंगू, छोटू उर्फ ​​वीरेंद्र और चिरंजीत कुमार उर्फ ​​देवा (जो बिहार का निवासी है) को सुपारी देकर हत्या करवाई थी।

READ ALSO  जातिगत टिप्पणी करने के मामले में युवराज सिंह को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत- जानिए विस्तार से

ट्रायल कोर्ट ने 19 फरवरी 2019 को सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में दलीलें और साक्ष्य

अपीलकर्ताओं (आरोपियों) के वकीलों ने तर्क दिया कि पूरा मामला केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब्ती के गवाह मुकर गए हैं (Hostile) और पुलिस द्वारा बरामदगी संदिग्ध है। बचाव पक्ष का कहना था कि केवल शक के आधार पर उन्हें फंसाया गया है।

दूसरी ओर, राज्य सरकार के वकील ने तर्क दिया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य सबूत स्पष्ट रूप से साजिश की ओर इशारा करते हैं। अभियोजन ने बताया कि हत्या का मकसद (Motive) अपेंद्र और मालती के बीच के अवैध संबंध थे, जिसमें मृतका बाधा बन रही थी।

READ ALSO  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पूर्व भाजपा विधायक की समयपूर्व रिहाई पर उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा

कोर्ट का विश्लेषण और टिप्पणी

हाईकोर्ट ने सबूतों का बारीकी से परीक्षण किया और सुप्रीम कोर्ट के फैसले (योगेश बनाम महाराष्ट्र राज्य) का हवाला देते हुए कहा कि आपराधिक साजिश के लिए प्रत्यक्ष सबूत मिलना दुर्लभ है, इसे परिस्थितियों और आरोपियों के आचरण से समझा जा सकता है।

कोर्ट ने निम्नलिखित प्रमुख साक्ष्यों को अहम माना:

  1. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR): 1 जनवरी 2015 से 20 जनवरी 2015 के बीच आरोपियों के बीच लगातार फोन पर बातचीत हुई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “अपराध में शामिल आरोपियों के बीच के संपर्क के तार पूरी तरह से जुड़े हुए हैं।”
  2. धन की व्यवस्था: एक साहूकार (गवाह PW-3) ने गवाही दी कि आरोपी मालती ने 19 जनवरी 2015 (घटना से एक दिन पहले) को अपने सोने के जेवर 60,000 रुपये में गिरवी रखे थे। कोर्ट ने माना कि यह पैसा हत्यारों को देने के लिए जुटाया गया था।
  3. हत्यारे की उपस्थिति: होटल के रजिस्टर और कर्मचारियों की गवाही से साबित हुआ कि बिहार से आया आरोपी चिरंजीत 19 से 20 जनवरी तक बिलासपुर के एक लॉज में रुका था।
  4. हत्या की क्रूरता: मृतका के पेट और शरीर पर चाकू के 6 गहरे घाव पाए गए। कोर्ट ने कहा, “अपराध की क्रूरता स्पष्ट है… इससे पता चलता है कि आरोपी मृतका को किसी भी हाल में जीवित नहीं छोड़ना चाहते थे।”
READ ALSO  यदि संबंध सफल नहीं हुआ तो रेप का मुक़दमा नहीं दर्ज करा देना चाहिए: हाईकोर्ट ने रेप की एफ़आईआर की रद्द

फैसला

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत सबूतों से यह स्पष्ट है कि आरोपियों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर साजिश रची। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:

“इस कोर्ट द्वारा जांचे गए सबूतों से यह साफ है कि अपीलकर्ताओं ने मृतका को रास्ते से हटाने के लिए साजिश रची, ताकि आरोपी अपेंद्र और मालती अपने ‘घिनौने सपने’ (Ugly dream) को सच कर सकें।”

परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने कु. मालती, अपेंद्र शुक्ला और अन्य तीन सह-आरोपियों की अपीलों को खारिज कर दिया और उनकी उम्रकैद की सजा को बहाल रखा।

केस डिटेल्स:

  • केस टाइटल: कु. मालती बनाम छत्तीसगढ़ राज्य (तथा अन्य संबद्ध अपीलें)
  • केस नंबर: CRA No. 423 of 2019, CRA No. 579 of 2019, CRA No. 517 of 2019
  • कोरम: जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत
  • अपीलकर्ताओं के वकील: श्री एम.पी.एस. भाटिया, सुश्री देवांशी चक्रवर्ती, श्री धीरेंद्र पांडे, श्री बरुण कुमार चक्रवर्ती, श्री पारसमणि श्रीवास, श्री विनय नागदेव, श्री लोकेश कुमार मिश्रा
  • राज्य के वकील: श्री अजय पांडे, जी.ए.

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles