क्या चेक बाउंस के केस में नोटिस कि सेवा की तारीख का उल्लेख नहीं होने पर केस रद्द किया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेक बाउंस से समबन्धित एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। 

माननीय न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट अधिनियम की धारा 138 के तहत दायर एक शिकायत को रद्द करने से इनकार कर दिया है और सुनवाई को फास्ट ट्रैक करने का आदेश दिया।

तर्क:-

आवेदक के वकील ने प्रस्तुत किया कि विचाराधीन चेक किसी मौजूदा दायित्व या ऋण के तहत दायर नहीं किया गया था, और शिकायत पर नोटिस सेवा की तारीख का खुलासा नहीं किया गया था। आगे यह भी कहा गया कि चूंकि नोटिस की तामील की तारीख का खुलासा नहीं किया गया था, इसलिए धारा 138 के तहत अभियोजन शुरू नहीं किया जा सकता।

दूसरी ओर, राज्य के वकील ने तर्क दिया कि नोटिस कि सेवा की तिथि कंप्लेंट में लिखना अनिवार्य नहीं था और यह परीक्षण के दौरान साक्ष्य का मामला था।

कोर्ट की टिप्पणियां: –

बेंच ने सीसी अलवी हाजी बनाम पलापेट्टी मुहम्मद में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें एक अन्य मामले, अजीत सीड्स लिमिटेड बनाम के गोपाल कृष्णैया के निर्णय का पालन किया गया था, जिसमें यह फैसला सुनाया गया था कि नोटिस की तामील की तारीख का उल्लेख न करना ट्रायल के वक़्त का मामला है 

इसलिए, कोर्ट ने कहा कि एक शिकायत को इसलिए शुरू में खारिज नहीं किया जा सकता है, क्यूंकि शिकायत में नोटिस की तारिख स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं है 

हालांकि, बेंच ने कहा कि शिकायत में चेक जारी करने वाले को नोटिस जारी करने के तरीके और तरीके के बारे में बुनियादी तथ्यों का उल्लेख होना चाहिए।

निर्णय:

संदर्भित उदाहरणों और ऊपर बताए गए कारणों के आलोक में, बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया।

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