नारदा स्कैम प्रकरण: टीएमसी नेताओ के पक्षकार अधिवक्ता ने सीबीआई पर निशाना साधते हुए कहा स्पेशल कोर्ट के समक्ष क्यों बोलती हो गई थी बंद

पश्चिम बंगाल—- नारदा केस में टीएमसी नेताओं की और से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट सिध्दार्थ लूथरा ने सीबीआई पर निशाना साधा है। उनका प्रश्न था कि स्पेशल कोर्ट के सामने एजेंसी की बोलती क्यों बंद हो गई थी। जब आरोपियों को जमानत दी जा रही थी तब एजेंसी ने आपत्ति क्यों नही दर्ज कराई। उनका कहना था कि एजेंसी ने केस ट्रांसफर की बात तब कही जब स्पेशल कोर्ट का फैसला उंसके मुताबिक नही आया। फैसला उल्टा होता तो कोई विवाद नही था। 

सिध्दार्थ लूथरा ने कहा कि सीबीआई एक जांच एजेंसी है। उसे किसी को सजा देने का हक नही है। एजेंसी के आरोपियों के विरूद्ध ठोस साक्ष्य एकत्र कर कोर्ट के समक्ष पेश करने थे,लेकिन नारदा मामले में सीबीआई शुरू से ही झूठ पर झूठ बोल रही है। एजेंसी के एफिडेविट देखे तो स्पष्ट हो जाता है कि अरेस्ट मेमो में क्या दर्ज है और कोर्ट में दाखिल हलफनामे में क्या लिखा गया है।

उनका कहना था कि सीबीआई के हिसाब से फैसला नही आया तो भीड़ तंत्र दवाब जैसे जुमलों का सहारा लिया जाने लगा। लूथरा का कहना था कि जज संविधान के अनुसार कार्य करने की शपथ लेते हैं। उन्हें नही लगता कि भीड़ की मौजूदगी से कोर्ट के कामकाज पर असर पड़ता है।

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एडवोकेट लूथरा ने उस दौर का जिक्र किया जब पंजाब में हालात बद्तर थे। उनका कहना था कि उस दौर में भी कोर्ट निष्पक्ष होकर फैसला करती थी। उनका कहना सीबीआई कह रही है भीड़ से जज के फैसले पर असर पड़ा। प्रशिक्षित और अनुशासित जज 40 से 50 केस रोजाना सुनते है। उनका सवाल था कि क्या हम यह मान सकते है कि भीड़ के जमा भर हो जाने से ही जज दवाब में आ सकते है? उनका फैसला भीड़ को देखकर पलट सकता है। 

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