कलकत्ता हाईकोर्ट ने पुराने पेंशन मामले में केंद्र सरकार को दिया पुनर्विचार का निर्देश, कहा तकनीकी इस्तीफे की शर्त अनिवार्य नहीं

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय को लोअर ग्रेड क्लर्क के एक कर्मचारी की पुरानी पेंशन योजना में शामिल होने संबंधी याचिका पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नियुक्ति पत्र में कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व किसी तरह की जानकारी देने की स्पष्ट शर्त नहीं रखी गई थी, तो ऐसी घोषणाओं को अनिवार्य नहीं बल्कि केवल निर्देशात्मक माना जाएगा।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा और न्यायमूर्ति विश्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने 7 सितंबर को दिए अपने आदेश में अधिकारियों को कर्मचारी के आवेदन पर बिना तकनीकी इस्तीफे का पेंच फंसाए विचार करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने मंत्रालय को छह सप्ताह के भीतर इस पूरे मामले में एक तर्कसंगत निर्णय पारित कर कर्मचारी को सूचित करने का आदेश दिया है।

प्रशासनिक रवैये पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

खंडपीठ ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर हमेशा अनिश्चितता बनी रहती है। कोर्ट ने कहा कि यह एक सामान्य बात है कि बेरोजगार युवा भर्ती विज्ञापन आने पर कई पदों के लिए एक साथ आवेदन करते हैं, क्योंकि नौकरी हासिल करना उनकी पहली प्राथमिकता होती है। विभिन्न विभागों में एक साथ कई पदों के लिए आवेदन करने पर किसी प्रकार की कानूनी रोक नहीं है।

अदालत ने कहा कि संबंधित विभाग ने कर्मचारी के मामले में बेहद कठोर और संकुचित दृष्टिकोण अपनाया। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नियोक्ता का यह दायित्व है कि वह सेवा में शामिल होते समय ही सभी नियमों और जरूरी घोषणाओं की जानकारी कर्मचारी को दे। इस मामले में सरकार ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई जिससे साबित हो सके कि चपरासी के पद पर नियुक्ति के समय अन्य लंबित आवेदनों का विवरण देना अनिवार्य था।

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भर्ती और सेवा का पूरा घटनाक्रम

इस मामले में कर्मचारी ने मई 2002 के एक विज्ञापन के आधार पर चपरासी पद के लिए आवेदन किया था। इसके बाद उसने 2005 में प्रकाशित एक अन्य विज्ञापन के जरिए लोअर ग्रेड क्लर्क पद के लिए भी अर्जी दी थी। चपरासी पद पर चयन होने के बाद उसने 15 सितंबर 2006 को अपनी सेवाएं शुरू कीं।

वर्ष 2007 में क्लर्क भर्ती का परिणाम घोषित हुआ, जिसमें उसका चयन हो गया। इसके बाद कर्मचारी ने चपरासी पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के पत्र में उसने साफ तौर पर यह कारण दर्ज किया कि उसका चयन लोअर ग्रेड क्लर्क के पद पर हो गया है और वह उस पद पर कार्यभार ग्रहण करने जा रहा है। उसने 27 मार्च 2007 को नई नौकरी संभाल ली। उस समय नियुक्ति पत्र में उसे नई पेंशन योजना (एनपीएस) 2004 के तहत रखा गया था।

विवाद और कानूनी दलीलें

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कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने 3 मार्च 2023 को एक सर्कुलर जारी कर केंद्र सरकार के सिविल कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना चुनने का एकमुश्त अवसर दिया था। इस आधार पर क्लर्क ने 8 अगस्त 2023 को आवेदन किया, लेकिन विभाग ने यह कहते हुए अर्जी खारिज कर दी कि उसने तकनीकी इस्तीफा दिए बिना सीधे चपरासी पद छोड़ा था और क्लर्क पद के लंबित आवेदन की जानकारी पहले नहीं दी थी। कर्मचारी ने इसे केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी थी, जहां 18 सितंबर 2025 को उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपाला बिन्नू कुमार और सैमसन स्टीफन ने पैरवी करते हुए दलील दी कि त्यागपत्र में नए पद का स्पष्ट उल्लेख किया गया था, इसलिए इसे तकनीकी इस्तीफा माना जाना चाहिए और कर्मचारी को पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता राकेश कुमार ने कहा कि कर्मचारी को पदभार ग्रहण करते समय पहले से लंबित आवेदन की जानकारी देनी चाहिए थी और ऐसा न करने के कारण वह नई पेंशन योजना के दायरे में ही आएगा।

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हाईकोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में इस्तीफा स्वीकार करते समय विभाग ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। ऐसे में अब उस आधार पर कर्मचारी को उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

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