बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के चुनाव पर लगाई रोक, रोहित पवार के परिजनों सहित 400 नए सदस्यों की भर्ती पर उठाए सवाल

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की एpex काउंसिल के 6 जनवरी को होने वाले चुनावों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने एसोसिएशन में 400 नए सदस्यों की अचानक भर्ती को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनमें MCA अध्यक्ष और एनसीपी (शरद पवार गुट) विधायक रोहित पवार के करीबी रिश्तेदार भी शामिल हैं।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने कहा कि नई सदस्यता प्रक्रिया जिस तरह से की गई, उससे यह “प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि सब कुछ अत्यधिक जल्दबाज़ी में किया गया।” यह आदेश पूर्व क्रिकेटर केदार जाधव सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें यह आरोप लगाए गए थे कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है और वोटर लिस्ट में “मनमाने ढंग” से लोगों को जोड़ा गया है।

याचिकाओं में कहा गया है कि 25 दिसंबर, 2025 को जारी की गई वोटर लिस्ट में शामिल किए गए कई नए सदस्यों का क्रिकेट से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें सिर्फ इसलिए जोड़ा गया ताकि MCA को कुछ लोग निजी संगठन की तरह चला सकें। इन नए सदस्यों में रोहित पवार की पत्नी कुंती पवार, ससुर सतीश मगर और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले की बेटी रेवती का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।

कोर्ट ने भी अपने आदेश में माना कि “नए सदस्यों में से कई वर्तमान अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों के रिश्तेदार हैं, जो संगठन के शीर्ष पर हैं।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा सदस्यों को न तो नए नामों पर आपत्ति जताने का मौका दिया गया और न ही अपेक्स काउंसिल और AGM की मीटिंग के मिनट्स उपलब्ध कराए गए। कोर्ट ने इस पूरे मामले में “अवैधता, मनमर्जी और भाई-भतीजावाद” के आरोपों को गंभीर माना और कहा कि ऐसे हालात में न्यायालय को हस्तक्षेप करना ही होगा।

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“ऐसे मामले में हाईकोर्ट ‘हैंड्स ऑफ’ रवैया नहीं अपना सकता। यदि चुनाव की अनुमति दी गई तो यह एक अवैधता को स्थायी रूप दे देगा,” कोर्ट ने कहा। इसके साथ ही कोर्ट ने चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक चुनाव प्रक्रिया न बढ़ाई जाए।

अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल फंड डोनेट करने से कोई व्यक्ति MCA का जीवन सदस्य बन सकता है। वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, जो MCA की ओर से पेश हुए, ने दलील दी कि नए सदस्यों ने क्रिकेट के विकास में करोड़ों रुपये का योगदान दिया है और MCA के नियमों में यह नहीं कहा गया कि केवल क्रिकेट से जुड़े व्यक्ति ही सदस्य बन सकते हैं।

लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि MCA का मुख्य उद्देश्य राज्य में क्रिकेट की गुणवत्ता बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम बनाना और क्रिकेट से जुड़े नीतिगत फैसले लेना है — और इन उद्देश्यों से समझौता नहीं किया जा सकता।

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हाईकोर्ट के इस आदेश से न केवल MCA के चुनाव की वैधता पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि देशभर में क्रिकेट संघों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस भी छिड़ गई है। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य की क्रिकेट संस्था में ऐसे आरोपों से भविष्य में अन्य संघों के संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

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