समाधान खोजिए, जिम्मेदार नागरिक बनिए: मुंबई के वायु प्रदूषण पर बॉम्बे हाईकोर्ट; बीएमसी ने उठाए गए कदम गिनाए

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को मुंबई में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर नागरिकों से जिम्मेदार व्यवहार करने की अपील करते हुए प्रदूषण से निपटने के लिए ठोस समाधान खोजने पर जोर दिया। इस दौरान बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने शहर में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का ब्यौरा अदालत के समक्ष रखा।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ मुंबई में वायु प्रदूषण से जुड़े मामलों पर दाखिल याचिकाओं के एक समूह की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने रियल एस्टेट डेवलपर्स के एक कंसोर्टियम द्वारा मामले में हस्तक्षेप के लिए दायर आवेदन पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।

पिछले महीने हाईकोर्ट के निर्देश के अनुपालन में बीएमसी ने एक हलफनामा दाखिल कर वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए उपायों की जानकारी दी। इनमें सेंसर एकीकरण, ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत काम रोकने के नोटिस जारी करना, बेकरी इकाइयों को स्वच्छ ईंधन पर स्थानांतरित करना, इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती, महत्वपूर्ण चौराहों पर धूल नियंत्रण इकाइयों की स्थापना तथा निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्रों का संचालन शामिल है।

अदालत ने पिछले महीने मुंबई के खराब एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) से निपटने के प्रयासों के तहत निर्माण स्थलों के निरीक्षण के लिए एक समिति गठित करने का भी निर्देश दिया था।

यह समिति 28 नवंबर को गठित की गई थी, जिसमें बीएमसी, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी), सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी तथा दो अधिवक्ता शामिल हैं। समिति ने 6 से 13 दिसंबर के बीच मुंबई और नवी मुंबई में विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया, जिसमें निर्माण परियोजनाओं को सामग्री आपूर्ति करने वाले रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट भी शामिल थे। उच्च AQI वाले क्षेत्रों की पहचान के बाद समिति ने बीएमसी के साथ बैठकें भी कीं।

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समिति की रिपोर्ट इस सप्ताह हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा,
“समाधान खोजिए। जिम्मेदार नागरिक बनिए।”

इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दी।

पीठ ने डेवलपर्स के हस्तक्षेप आवेदन पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वह पहले यह जांच करेगी कि रियल एस्टेट डेवलपर्स स्वयं प्रदूषण नियंत्रण मानकों के उल्लंघन में तो नहीं हैं।

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डेवलपर्स ने दलील दी कि अदालत द्वारा अनिवार्य किए गए सेंसर-आधारित वायु गुणवत्ता निगरानी मानकों का पालन व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, क्योंकि बीएमसी ने केवल 13 विक्रेताओं को अधिकृत किया है, जो कथित तौर पर पर्याप्त संख्या में सेंसर उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हैं।

हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह आगे कोई निर्देश जारी करने से पहले समिति की रिपोर्ट का अवलोकन करेगा।

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