“ग्लोब-ट्रॉटिंग” करार दिए गए NCP पार्षद: अंबरनाथ परिषद विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठाणे कलेक्टर के आदेशों पर लगाई रोक

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को अंबरनाथ नगर परिषद में राजनीतिक गठबंधनों की मान्यता और अमान्यता को लेकर ठाणे जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेशों को फिलहाल स्थगित कर दिया। अदालत ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पार्षदों के बार-बार पाला बदलने को हल्के-फुल्के अंदाज में “ग्लोब-ट्रॉटिंग” (दुनिया घूमने जैसा) करार दिया।

न्यायमूर्ति रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति अभय ए. मांत्री की खंडपीठ ने भाजपा-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन अंबरनाथ विकास आघाड़ी (AVA) द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए ठाणे कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे भाजपा, कांग्रेस, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजीत पवार गुट) सहित सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का मौका दें।

यह विवाद 20 दिसंबर 2025 को अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव के बाद उत्पन्न हुआ, जिसमें शिवसेना (शिंदे गुट) को 60 में से 27 सीटें मिलीं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने अपने राज्य स्तरीय सहयोगी कांग्रेस और एनसीपी के साथ अंबरनाथ विकास आघाड़ी के नाम से गठबंधन कर सत्ता में आने की कोशिश की।

ठाणे जिलाधिकारी ने 7 जनवरी को इस गठबंधन को पूर्व-चुनावी गठबंधन के रूप में मान्यता दे दी। हालांकि, बाद में कांग्रेस ने अपने 12 निर्वाचित पार्षदों को निलंबित कर दिया, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए। इसी बीच, एनसीपी के चार पार्षदों ने शिवसेना को समर्थन दे दिया, जिसके बाद जिलाधिकारी ने 9 जनवरी को अपने पहले आदेश को रद्द करते हुए शिवसेना-एनसीपी गठबंधन को पूर्व-चुनावी गठबंधन के रूप में मान्यता दे दी।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति घुगे ने कहा, “आज ये चार लोग उनके (शिंदे) साथ हैं, कल किसी और के साथ थे। ये तो ग्लोब-ट्रॉटिंग कर रहे हैं। अगर कल ये किसी और के साथ चले जाएं तो?”

अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए निर्देश दिया कि:

  • सभी पक्षकार 28 जनवरी तक लिखित प्रस्तुतियाँ कलेक्टर को दें।
  • कलेक्टर 21 दिनों के भीतर कारण सहित नया आदेश पारित करें।
  • नया आदेश पारित होने के दो सप्ताह तक प्रभाव में नहीं आएगा, ताकि कोई भी पक्ष उच्च न्यायालय का रुख कर सके।
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“तब तक 7 और 9 जनवरी को जारी जिलाधिकारी के आदेशों को स्थगित रखा जाएगा,” अदालत ने कहा।

अंबरनाथ विकास आघाड़ी द्वारा दायर याचिका को हाईकोर्ट ने निर्देशों के साथ निस्तारित कर दिया। अब मामला पुनः ठाणे जिलाधिकारी के समक्ष सुनवाई और नए आदेश के लिए भेजा गया है।

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