योगी आदित्यनाथ पर फिल्म को प्रमाणपत्र देने में देरी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को फटकार लगाई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित फिल्म अजेय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ ए योगी को प्रमाणपत्र देने में देरी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि जब फिल्म एक ऐसी पुस्तक पर आधारित है जो वर्षों से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है और किसी विवाद में नहीं रही, तो प्रमाणन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी क्यों की गई।

यह याचिका फिल्म के निर्माता सम्राट सिनेमैटिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने दायर की थी, जिसमें CBFC द्वारा फिल्म को प्रमाणपत्र देने से इनकार करने को चुनौती दी गई है। फिल्म लेखक शांतनु गुप्ता की 2017 में प्रकाशित पुस्तक द मोंक हू बिकेम चीफ मिनिस्टर से प्रेरित बताई जा रही है।

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डॉ. नीला गोकले की खंडपीठ ने CBFC को नोटिस जारी कर शुक्रवार तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने 5 जून को फिल्म प्रमाणन के लिए आवेदन किया था। सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणीकरण) नियम, 2024 के अनुसार, CBFC को एक सप्ताह में आवेदन प्रक्रिया पूरी कर 15 दिनों के भीतर स्क्रीनिंग निर्धारित करनी होती है। लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बोर्ड की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि CBFC ने जानबूझकर प्रक्रिया को रोका है, जबकि फिल्म 1 अगस्त को देशभर के 1,500 से अधिक सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने CBFC की प्राथमिकता योजना के तहत तीन गुना शुल्क अदा कर 7 जुलाई को स्क्रीनिंग निर्धारित करवाई थी, जिसे बिना किसी कारण बताए रद्द कर दिया गया।

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निर्माताओं ने यह भी आरोप लगाया कि CBFC ने उनसे उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) लाने की मांग की, जो कि प्रमाणन नियमों में कहीं भी अनिवार्य नहीं है। याचिका में कहा गया कि “जिस पुस्तक पर फिल्म आधारित है, उसे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा औपचारिक रूप से समर्थन प्राप्त है। यह फिल्म एक सच्ची, सम्मानजनक और प्रेरणादायक प्रस्तुति है।”

अदालत ने कहा कि जब प्राथमिकता शुल्क लिया गया है तो CBFC अनिश्चितकाल तक आवेदन को लंबित नहीं रख सकता। “आवेदन पर निर्णय लेना ही होगा, आप बस उसे लटकाकर नहीं रख सकते,” अदालत ने कहा।

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गौरतलब है कि इसी मुद्दे पर दायर एक पूर्व याचिका 17 जुलाई को यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि CBFC दो दिनों में निर्णय ले लेगा। लेकिन ऐसा न होने पर निर्माता एक बार फिर अदालत पहुंचे हैं और फिल्म की नियोजित रिलीज़ से पहले राहत की मांग कर रहे हैं।

अब अदालत CBFC के जवाब के बाद मामले की आगे सुनवाई करेगी।

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