बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को मुंबई महानगर में सड़क और फुटपाथों पर हो रही अवैध हॉकिंग को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए नगर निगम और पुलिस को व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि सभी हॉकर्स और उनके सहायकों की पहचान की पूरी तरह से जांच की जाए, और यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से भारत में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए, जिसमें प्रत्यावर्तन भी शामिल है।
न्यायमूर्ति ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाटा की खंडपीठ यह निर्देश उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दे रही थी, जिनमें शहर में अनधिकृत हॉकिंग के कारण पैदल यात्रियों और वाहनों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया गया था।
अदालत ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) को निर्देश दिया कि वह शहर में सड़कों और फुटपाथों पर लगे सभी अस्थायी और स्थायी ठेलों व दुकानों का विस्तृत निरीक्षण करे। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इनका संचालन आम जनता की आवाजाही में बाधा न बने।
पीठ ने स्पष्ट कहा कि हॉकिंग या उससे संबंधित गतिविधियों में लगे हर व्यक्ति—चाहे वह विक्रेता हो या सहायक—की पहचान की गहन जांच की जानी चाहिए। इसमें वे लोग भी शामिल हैं जिनके बारे में संदेह है कि वे बांग्लादेशी या अन्य विदेशी नागरिक हो सकते हैं।
अदालत ने कहा कि यदि जांच के दौरान कोई व्यक्ति अवैध प्रवासी पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाए, जिसमें उन्हें उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया भी शामिल हो।
हॉकर्स के नियमन को लेकर अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि करीब 99,000 लोगों को पहले ही हॉकिंग के लिए पात्र पाया गया है। नगर निगम को निर्देश दिया गया है कि केवल इन्हीं पंजीकृत हॉकर्स को निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए काम करने की अनुमति दी जाए।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग इस सूची में शामिल नहीं हैं, उन्हें तत्काल हटाया जाए और केवल पात्र हॉकर्स को ही गतिविधियां जारी रखने दी जाएं।
यह आदेश शहर में सार्वजनिक स्थानों के सुव्यवस्थित उपयोग और नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

