बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LLB पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा समाप्त कर दी है। इस फैसले के बाद अब किसी भी उम्र के उम्मीदवार कानून की पढ़ाई के लिए प्रवेश ले सकेंगे। BCI के निर्णय की जानकारी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आयु सीमा को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा कर दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ को बताया गया कि BCI की जनरल काउंसिल ने कानून के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु संबंधी प्रतिबंध वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया है।
BCI की ओर से पेश अधिवक्ता राधिका गौतम ने कोर्ट को इस निर्णय की जानकारी दी। इसके बाद पीठ ने कहा कि आयु सीमा हटाए जाने के कारण याचिका अब निष्प्रभावी हो गई है और उसका निपटारा कर दिया।
BCI के आयु सीमा संबंधी नियम को दी गई थी चुनौती
यह मामला ऋषभ दुग्गल की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। उन्होंने BCI के वर्ष 2016 के उस सर्कुलर को चुनौती दी थी, जिसके जरिए विधि शिक्षा नियम, 2008 की अनुसूची III के क्लॉज 28 को दोबारा लागू किया गया था।
इस प्रावधान के तहत पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 20 वर्ष निर्धारित थी। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 22 वर्ष थी।
मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने BCI के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें पांच वर्षीय LLB पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम आयु 22 वर्ष और तीन वर्षीय LLB पाठ्यक्रम के लिए 45 वर्ष निर्धारित की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा था स्पष्टीकरण
इससे पहले 25 सितंबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने BCI से स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वह पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा वापस लेने को तैयार है।
इसके बाद BCI ने अपनी जनरल काउंसिल के प्रस्ताव की जानकारी कोर्ट को दी और पुष्टि की कि प्रवेश के लिए अधिकतम आयु संबंधी प्रतिबंध समाप्त कर दिए गए हैं।
इस फैसले को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि याचिका पर आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं रह गई है और उसे निष्प्रभावी मानते हुए निपटा दिया।
BCI के इस निर्णय के बाद तीन वर्षीय और पांच वर्षीय LLB पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु की बाध्यता समाप्त हो गई है।
