“छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम किसी की विशिष्ट संपत्ति नहीं हो सकता”: बॉम्बे हाईकोर्ट ने महेश मांजरेकर की फिल्म ‘पुन्हा शिवाजी राजे भोसले’ की रिलीज़ को दी मंज़ूरी

 बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि “छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम किसी भी रूप में किसी एक व्यक्ति या संस्था की विशिष्ट संपत्ति नहीं हो सकता,” और इस टिप्पणी के साथ मराठी फिल्म ‘पुन्हा शिवाजी राजे भोसले’ की निर्धारित रिलीज़ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति अमित जमसंदेकर की अवकाश पीठ ने गुरुवार को जारी आदेश में फिल्म की रिलीज़ पर रोक की मांग करने वाली एवरेस्ट एंटरटेनमेंट एलएलपी की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर पर कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप लगाए गए थे।

एवरेस्ट एंटरटेनमेंट ने वर्ष 2009 में महेश मांजरेकर की अश्वमी फिल्म्स के साथ मिलकर मराठी फिल्म ‘मी शिवाजी राजे भोसले बोलतोय’ बनाई थी। कंपनी का कहना था कि उसने 2013 में इस फिल्म के सभी अधिकार अपने नाम कर लिए थे और उसे इस वर्ष पता चला कि मांजरेकर इसी फिल्म की कथित ‘सीक्वल’ बना रहे हैं।

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याचिका में आरोप लगाया गया कि मांजरेकर की नई फिल्म ‘पुन्हा शिवाजी राजे भोसले’ में कहानी, संवाद और पात्रों की संरचना मूल फिल्म से मिलती-जुलती है, जिससे कॉपीराइट का उल्लंघन हुआ है।

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के सभी दावों को ख़ारिज करते हुए कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज” का नाम एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिस पर किसी को भी विशिष्ट अधिकार नहीं दिया जा सकता।

“छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम किसी भी रूप में विशिष्ट अधिकार का विषय नहीं हो सकता,” न्यायमूर्ति जमसंदेकर ने कहा।

अदालत ने यह भी माना कि मांजरेकर की फिल्म “पूरी तरह से एक नया काम” है और इसका मूल फिल्म से कोई प्रत्यक्ष समानता नहीं है।

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“मराठी फिल्मों का समझदार और परिपक्व दर्शक वर्ग किसी भ्रम या धोखे में नहीं आएगा,” अदालत ने कहा।

एवरेस्ट के इस दावे को भी अदालत ने अस्वीकार कर दिया कि मांजरेकर ने उनके संवादों की नकल की है। न्यायालय ने कहा कि ये संवाद “सामान्य शब्द और अभिव्यक्तियाँ” हैं, जिन्हें हर मराठी भाषी व्यक्ति और मराठी साहित्य, नाटक तथा फिल्मों में प्रयोग किया जाता है।

“जिन संवादों पर याचिकाकर्ता कॉपीराइट का दावा कर रहा है, वे उसके मौलिक सृजन नहीं हैं,” अदालत ने कहा।

न्यायमूर्ति जमसंदेकर ने यह भी कहा कि एवरेस्ट एंटरटेनमेंट ने जानबूझकर राहत पाने में देरी की और यह देरी “गणनात्मक” (calculated) प्रतीत होती है।

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“याचिकाकर्ता की चुप्पी एक सोचा-समझा कदम लगती है ताकि अदालत और प्रतिवादी पर दबाव डाला जा सके,” आदेश में कहा गया।

अदालत ने टिप्पणी की कि “जो पक्ष सुस्त रवैया अपनाता है, वह किसी भी तरह की न्यायिक राहत पाने का हकदार नहीं होता” और अंतिम क्षण में दायर अंतरिम राहत की याचिकाओं को हतोत्साहित किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने यह मानते हुए कि कॉपीराइट उल्लंघन का कोई ठोस मामला नहीं बनता, याचिका को खारिज कर दिया।

इस फैसले के साथ महेश मांजरेकर की फिल्म ‘पुन्हा शिवाजी राजे भोसले’ अब तय कार्यक्रम के अनुसार शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

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