पति की बेल मंजूर मगर सास और ननद की खारिज

मामले के तथ्य

शिकायतकर्ता की बेटी की शादी तीसरे आरोपी-याचिकाकर्ता बानू चंदर से हुई थी।

वे अपने सात महीने के बेटे के साथ चेन्नई में रह रहे थे। इसके बाद, कोविड-19 महामारी की स्थिति के बीच वे पति के पैतृक निवास पर चली गईं।

अपने ससुराल में, पीड़िता को पहले और दूसरे आरोपी-याचिकाकर्ताओं के साथ झगड़े में शारीरिक रूप से चोट पहुॅंची। पहले और दूसरे आरोपी पीड़िता की सास और ननद हैं।

शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण पीड़ित ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।

याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि पीड़िता का पति मौजूदा कोविड-19 महामारी की स्थिति के कारण बेरोजगार था।

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि पीड़िता उनकी अस्थिर वित्तीय स्थिति के कारण उदास था । इसी कारण से पीड़िता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। याचिकाकर्ताओ का पीड़िता की आत्महत्या में कोई हाथ नहीं है।

वकील ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता 21.09.2020 के बाद से हिरासत में हैं। यह प्रार्थना की कि उन्हें जमानत दी जाए।

प्रतिवादी की ओर से तर्क

प्रतिवादी सरकारी वकील ने याचिकाकर्ताओं के वकील के तर्को का विरोध किया।

सरकारी वकील ने जोर दिया कि याचिकाकर्ता-पति के घर में रहने के दौरान, पीड़िता का उसकी बहन के साथ झगड़ा हुआ था।

इस झगड़े में पीड़िता के सिर में 5 टांके लगाए थे। वकील ने यह भी कहा कि पति ने पीड़िता का समर्थन नहीं किया।

इससे पीड़िता हताशा हो गया और उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

पति की जमानत मंजूर मगर सास और ननद की खारिज


दोनों पक्षों के वकीलों की बहस को ध्यान में रखते हुए और मृतक की सास और ननद के आरोपों पर विचार करते हुए, मद्रास उच्च न्यायालय ने सास और ननद कोजमानत देने में असमर्थता महसूस की और तदनुसार उनकी याचिका खारिज कर दी।

हालाँकि, मृतका के पति के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उसके द्वारा झगड़े की अवधि को देखते हुए, न्यायालय ने पीके शाजी बनाम केरल राज्य में माननीय सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित शर्तों के साथ पति को जमानत देना उचित समझा।

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