49 साल से अलग रह रहे बुजुर्ग पति-पत्नी को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दी आपसी सहमति से तलाक की मंजूरी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले 49 वर्षों से अलग रह रहे एक बुजुर्ग दंपत्ति के विवाह को आपसी सहमति से समाप्त करने का आदेश दिया है। 70 वर्षीय पत्नी और 72 वर्षीय पति के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना न देखते हुए अदालत ने तलाक के लिए अनिवार्य छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि को भी माफ कर दिया।

जस्टिस बट्टू देवानंद और जस्टिस सुनिता गंधम की पीठ ने 13 अगस्त को जारी अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विधायिका का उद्देश्य हिंदू विवाह को आपसी सहमति से आसानी से समाप्त करने की सुविधा देना था। पीठ ने टिप्पणी की कि यह बदलाव हिंदू विवाह को केवल एक अविभाज्य संस्कार मानने के बजाय एक संविदात्मक समझौते के रूप में देखने की दिशा में कानून के विकास को दर्शाता है।

आपसी सहमति और समझौते की शर्तें

यह फैसला पत्नी (गृहिणी) द्वारा फैमिली कोर्ट के 3 जून 2024 के आदेश के खिलाफ दायर की गई अपील पर आया है। फैमिली कोर्ट ने पति (सेवानिवृत्त कर्मचारी) द्वारा क्रूरता और परित्याग के आधार पर दायर याचिका को स्वीकार करते हुए विवाह भंग कर दिया था, जिसे पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत से अपने पुराने विवादों को खत्म करने का फैसला किया। समझौते के तहत पति अपनी पत्नी को 20,000 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने पर सहमत हुए। इसके अलावा दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ लंबित कानूनी मामले वापस लेने का निर्णय लिया, जिसमें पति द्वारा दर्ज आपराधिक शिकायत और पत्नी द्वारा दायर एक अन्य मामला शामिल है।

सुलह की कोशिशें रहीं नाकाम

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान दंपत्ति के बीच सुलह कराने और उन्हें साथ रहने की सलाह देने का प्रयास किया, लेकिन लंबे अलगाव और बिगड़े संबंधों के कारण दोनों में से किसी ने भी दोबारा साथ रहने की इच्छा नहीं जताई।

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इस दंपत्ति का विवाह 4 जून 1972 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार हुआ था और उनकी कोई संतान नहीं है। दोनों सितंबर 1978 से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे। मामले में पत्नी का पक्ष अधिवक्ता जी. विजया सारधी ने रखा, जबकि पति की ओर से अधिवक्ता टी. सी. कृष्णन पेश हुए। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पूर्व आदेश को निरस्त करते हुए आपसी सहमति के आधार पर तलाक की डिक्री मंजूर कर ली।

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