सांसद अमृतपाल सिंह की सदस्यता पर मंडराया खतरा; 60 दिनों से सदन से अनुपस्थित, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पैरोल याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने संसद के बजट सत्र में शामिल होने के लिए अस्थायी रिहाई (पैरोल) की मांग की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट को सूचित किया गया कि खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल लगातार 60 बैठकों से सदन से अनुपस्थित रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 101(4) के तहत, यदि कोई सांसद बिना अनुमति के 60 दिनों तक अनुपस्थित रहता है, तो सदन उनकी सीट को खाली घोषित कर सकता है।

‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख 33 वर्षीय अमृतपाल सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। वह अप्रैल 2023 से असम की डिब्रूगढ़ जेल में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत बंद हैं। उन्हें अजनाला थाने की घटना के बाद एक महीने तक चली तलाशी के बाद गिरफ्तार किया गया था।

अमृतपाल ने बजट सत्र (जो दो चरणों में आयोजित है: 28 जनवरी से 13 फरवरी और 9 मार्च से 2 अप्रैल) में भाग लेने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में तर्क दिया गया कि उन्हें पंजाब में 2025 की बाढ़, बढ़ती नशीली दवाओं की समस्या और अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने के लिए संसद में उपस्थित होना आवश्यक है। इससे पहले, पंजाब सरकार ने “राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे” का हवाला देते हुए उनकी अस्थायी रिहाई की अर्जी खारिज कर दी थी।

लोकसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) सत्यपाल जैन ने चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ को बताया कि सोमवार तक अमृतपाल की अनुपस्थिति 59 बैठकों तक पहुंच गई थी और आज यह 60 दिन पूरे हो गए हैं।

जैन ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 101(4) के अनुसार, यदि कोई सदस्य 60 दिनों तक बिना अनुमति के अनुपस्थित रहता है, तो सदन उस सीट को रिक्त घोषित करने का अधिकार रखता है। हालांकि, उन्होंने एक प्रक्रियात्मक समाधान का भी उल्लेख किया।

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ASG ने कहा, “सदन से अनुपस्थिति को माफ करने के लिए लोकसभा की एक समिति है। यदि कोई सांसद अपनी अनुपस्थिति के कारणों के साथ आवेदन देता है, तो समिति उस पर विचार कर अपनी सिफारिशें सदन को सौंप सकती है। सामान्य तौर पर लोकसभा ऐसी अनुपस्थिति को माफ कर देती है।”

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि:

  • अमृतपाल सिंह को इस प्रक्रिया के बारे में सूचित कर दिया गया है।
  • हिरासत (detention) को अनुपस्थिति माफ करने के लिए एक वैध आधार माना जा सकता है।
  • इससे पहले भी दो बार उनकी अनुपस्थिति को माफ किया जा चुका है।
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डिजिटल माध्यम से शामिल होने के सवाल पर कोर्ट को बताया गया कि लोकसभा के नियमों में वर्तमान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी सांसद को वर्चुअल मोड के जरिए सत्र में भाग लेने की अनुमति देता हो।

पंजाब सरकार अमृतपाल की रिहाई के विरोध में अडिग है। अप्रैल 2025 में उनके खिलाफ NSA की अवधि बढ़ा दी गई थी। राज्य का तर्क है कि उनकी रिहाई से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। सरकार ने फरवरी 2023 की अजनाला घटना का हवाला दिया, जहां अमृतपाल और उनके समर्थकों पर अपने एक साथी को छुड़ाने के लिए पुलिस के साथ हिंसक झड़प करने का आरोप है।

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केंद्र और याचिकाकर्ता के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट का यह फैसला तय करेगा कि क्या अमृतपाल सिंह को अपने विधायी कर्तव्यों का पालन करने के लिए पैरोल दी जाएगी या उन्हें अपनी सदस्यता बचाने के लिए लोकसभा समिति की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर रहना होगा।

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