पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने संसद के बजट सत्र में शामिल होने के लिए अस्थायी रिहाई (पैरोल) की मांग की थी। सिंह ने पंजाब सरकार के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी इस अर्जी को नामंजूर कर दिया गया था।
चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि इस आदेश में कोई “संवैधानिक या कानूनी खामी” नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मामला प्रिवेंटिव डिटेंशन (निवारक निरोध) का हो, तो देश की सुरक्षा और संप्रभुता किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता या संसदीय कर्तव्यों से ऊपर होती है।
‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख और खडूर साहिब से सांसद 33 वर्षीय अमृतपाल सिंह फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी कि उन्हें 28 जनवरी से शुरू हुए बजट सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने क्षेत्र के मुद्दों जैसे कि 2025 की बाढ़, नशे की समस्या और विकास कार्यों को संसद में उठा सकें।
हालांकि, पंजाब सरकार ने 2 फरवरी के अपने आदेश में इस अर्जी को ठुकरा दिया था। सरकार ने इसके पीछे “राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे” का हवाला दिया था। यह निर्णय अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) की उन गोपनीय रिपोर्टों पर आधारित था, जिनमें अमृतपाल की रिहाई से सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई गई थी।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर खतरे की आशंका अभी भी बनी हुई है। कोर्ट ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राज्य की सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया।
हाईकोर्ट ने कहा, “जब भी किसी ऐसे व्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार, जो प्रिवेंटिव डिटेंशन में है, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के सामने आता है, तो सबसे पहले यह देखा जाना चाहिए कि क्या उसे स्वतंत्रता देने से सार्वजनिक व्यवस्था पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”
बेंच ने आगे यह भी स्पष्ट किया कि यदि सक्षम प्राधिकारी के मन में सुरक्षा भंग होने का जरा सा भी संदेह है, तो व्यक्ति की स्वतंत्रता को गौण माना जाएगा। कोर्ट के अनुसार, “राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि होती है। किसी व्यक्ति के बोलने या स्वतंत्रता का अधिकार हमेशा सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्र की सुरक्षा के अधीन होता है।”
अमृतपाल सिंह के सांसद होने के तर्क पर कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 105 और पिछले न्यायिक फैसलों का हवाला दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि एनएसए के तहत हिरासत में लिए गए किसी सांसद को एक सामान्य नागरिक की तुलना में कोई विशेष या उच्च अधिकार प्राप्त नहीं है।
अदालत ने यह भी साफ किया कि वह उन तथ्यों या सामग्री की गहराई में नहीं जाएगी जिसके आधार पर प्रशासन ने सुरक्षा का खतरा महसूस किया है, क्योंकि यह अधिकारियों की “व्यक्तिगत संतुष्टि” (Subjective Satisfaction) का मामला है।
अमृतपाल सिंह को 23 अप्रैल 2023 को मोगा के रोडे गांव से गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी अजनाला की उस घटना के बाद हुई थी, जिसमें सिंह और उनके समर्थकों ने अपने एक साथी को छुड़ाने के लिए पुलिस थाने पर हमला किया था। अप्रैल 2025 में उनकी हिरासत को एनएसए के तहत बढ़ा दिया गया था।
अंततः, हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका को बिना किसी लागत (costs) के खारिज कर दिया।

