उत्तर प्रदेश के 45 मेडिकल कॉलेजों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करे सरकार: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य के 45 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं को चाक-चौबंद करने के लिए एक समग्र कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह रोडमैप केवल नवजात और बाल चिकित्सा सेवाओं तक सीमित न रहे, बल्कि इसमें आम मरीजों की जरूरी चिकित्सा सुविधाओं, विशेष रूप से पर्याप्त संख्या में सामान्य और अत्याधुनिक वेंटिलेटरों की उपलब्धता को भी शामिल किया जाए।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश आशुतोष कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका और उससे जुड़ी अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के लिए आईसीयू (पीआईसीयू) और नवजात शिशुओं के लिए विशेष देखभाल इकाइयों (एनएनआईसीयू) को मजबूत करने के साथ-साथ सभी रोगियों के संपूर्ण इलाज की व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिए।

विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों से सलाह ले सरकार

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रदेश के 45 मेडिकल कॉलेजों के लिए योजना तैयार करते समय विशेषज्ञ संस्थानों से तकनीकी सुझाव लिए जाएं। इसके लिए लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) जैसी शीर्ष संस्थाओं से मार्गदर्शन लेने को कहा गया है।

पांच जिलों में ‘ई-सारथी’ डिजिटल रेफरल सिस्टम का ट्रायल

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि मरीजों को बेहतर इलाज के लिए रेफर करने के मकसद से ‘ई-सारथी’ डिजिटल प्लेटफॉर्म का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। वर्तमान में यह व्यवस्था पांच जिलों—इटावा, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी और फिरोजाबाद—में लागू की गई है, जहां सैफई स्थित मेडिकल कॉलेज को मुख्य रेफरल केंद्र बनाया गया है। सरकार ने अदालत को बताया कि इस ट्रायल के नतीजों की समीक्षा और जरूरी तकनीकी सुधारों के बाद इस डिजिटल व्यवस्था को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।

सुलतानपुर में नवजात की मौत पर मुआवजे को लेकर जवाब तलब

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अदालत ने सुलतानपुर स्थित राजकीय स्वशासी मेडिकल कॉलेज में एक नवजात शिशु की मौत के मामले पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। बच्चे की मौत कथित तौर पर समय पर ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और विशेषज्ञ डॉक्टर न मिलने के कारण हुई थी। कोर्ट ने विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार से पूछा कि पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा क्यों नहीं दिया जाना चाहिए।

अदालत ने राज्य सरकार को इस पहलू पर विचार करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर तय की है।

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