इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के कामकाज के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए

शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिला न्यायालयों और न्यायाधिकरणों के कामकाज के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।

महानिबंधक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि माननीय न्यायालय द्वारा पूर्व के दिशा-निर्देशों के आंशिक संशोधन में निम्नलिखित निर्देश जारी किए जा रहे हैं –

  1. उच्च न्यायालय के अधीनस्थ न्यायालय / न्यायाधिकरण केवल लंबित मामलों को ही लेंगे जैसे जमानत, रिहाई, धारा 164 सीआरपीसी के तहत बयान की रिकॉर्डिंग, रिमांड, विविध का निपटान, अत्यावश्यक आपराधिक आवेदन, समय-समय पर जारी उच्च अधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के निर्देश, और साथ ही, दीवानी प्रकृति के तत्काल मामलों (जैसे निषेधाज्ञा मामले और दीवानी प्रकृति के अन्य आवेदन) को urgency के अनुसार सुना जा सकता है।
  2. अन्य दीवानी मामलों (जैसे नए वाद आदि) की तात्कालिकता स्थानीय स्तर पर तय की जा सकती है और इसकी सुनवाई के लिए आदेश दिया जा सकता है। ज्यादा से ज्यादा 08 न्यायिक अधिकारियों को ऐसे मामलों को रोटेश द्वारा सौंपा जाएगा।
  3. मामलों का निर्णय/निपटान करते समय पारित सभी आदेश सीआईएस में अपलोड किए जाएं।
  4. आवेदनों के निपटान, आदेश पारित/अपलोड करने के संबंध में स्थानीय तंत्र विकसित किया जा सकता है।
  5. जिला न्यायाधीश न्यायालय परिसर में कोर्ट स्टाफ की न्यूनतम प्रविष्टि सुनिश्चित करेंगे। उनके कर्तव्यों को रोटेशन द्वारा, साप्ताहिक आधार पर दिन तय करके और समय स्लॉट में सौंपा जा सकता है।
  6. COVID-19 महामारी की रोकथाम को ध्यान में रखते हुए अधिकतम 30% से कोर्ट स्टाफ (चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों सहित) को किसी विशेष दिन/तारीख (जहां लागू हो) की ड्यूटी लगायी जाएगी।

उपरोक्त दिशानिर्देश 05.06.2021 (गर्मियों की छुट्टियों के बाद) से अगले आदेश तक लागू रहेंगे।

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