इलाहाबाद हाईकोर्ट में फिजिकल हियरिंग की मांग तेज़

कोरोना संक्रमण का असर काफी कम होने और सीमाओं के साथ, कार्यालयों और बाजारों के खुलने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट में फिजिकल हियरिंग की मांग तेज़ हो गयी है। 

वकीलों ने मांग की है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय में नियमित आधार पर मामलों की सुनवाई की जाए। वकील COVID19 के आलोक में अपेक्षित सीमा के साथ नियमित अदालती सत्र की मांग कर रहे  हैं।  अदालत में भौतिक सुनवाई करने की दिशा में ठोस कार्रवाई करने का आह्वान किया गया है।

मामले की सुनवाई करने वाली अदालतों की संख्या कम हो गई है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रतिदिन 1200 से अधिक मामले दर्ज होते हैं। हालांकि, उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष श्री राधाकांत ओझा के अनुसार, मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों की संख्या सीमित है। ऊपर से मामलों का निर्धारण नियमों के अनुसार नहीं किया जाता है। 

कुछ मामलों की सुनवाई दाखिले के दिन होती है तो कुछ की सुनवाई दो से तीन दिन बाद होती है। जबकि कुछ के नंबर दो से तीन महीने में आता है । वकील वर्चुअल हियरिंग सिस्टम के बारे में चिंतित हैं; ऐसे मामले में, नियमित और निर्बाध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए वास्तविक कार्रवाई की जानी चाहिए।

वर्चुअल हियरिंग सिस्टम नाकाफी

वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ तिवारी के अनुसार अधिवक्ताओं पर आवश्यक प्रतिबंध लगाकर फिजिकल सुनवाई जी व्यवस्था की जाए। इससे वकीलों और वादियों दोनों को फायदा होगा। 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय लखनऊ में भी ऐसी ही आवाज उठाई जा रही है, जहां अवध बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सचिव भौतिक सुनवाई फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं, इस तथ्य को देखते हुए कि सरकार द्वारा मॉल, जिम सहित सभी क्षेत्रों को खोल दिया गया है।।

वर्चुअल हीयरिंग की व्यवस्था सुधरी

जहां वकील भौतिक सुनवाई फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने अपने वर्चुअल सुनवाई मंच को जित्सी मीट से सिस्को वेबएक्स में अपग्रेड कर दिया है।

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