₹22 लाख में PhD और प्रोफेसर की नौकरी का झांसा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस महिला के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने से इनकार कर दिया है, जिस पर एक अभ्यर्थी से पीएचडी (PhD) की डिग्री और असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पर 22 लाख रुपये से अधिक की ठगी करने का आरोप है। समाज में गिरते नैतिक स्तर पर कड़ी टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार की प्रभावकारिता में विश्वास के कारण शिक्षित लोग भी इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं।

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने प्रियंका सेंगर द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने कानपुर के स्वरूप नगर थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी।

मामले के अनुसार, तान्या दीक्षित ने 14 सितंबर 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि याचिकाकर्ता प्रियंका सेंगर ने सह-आरोपियों विक्रम सिंह सेंगर, तृप्ति सिंह सेंगर और सान्या सिंह सेंगर के साथ मिलकर पीड़िता को अलीगढ़ के एक विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश और कानपुर के एक विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था।

इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए, दीक्षित और उनकी मां ने आरोपियों के बैंक खातों में कुल 22.18 लाख रुपये स्थानांतरित कर दिए। हाईकोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि सूचना देने वाली (तान्या) ने न तो पीएचडी के लिए और न ही नौकरी के लिए कभी आधिकारिक तौर पर आवेदन किया था।

जून 2024 में, आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़िता को फर्जी दस्तावेजों का एक पुलिंदा सौंपा, जिसमें शामिल थे:

  • पीएचडी की मार्कशीट और प्रवेश पत्र।
  • शोध विषय (Topic) की मंजूरी का पत्र।
  • कानपुर स्थित विश्वविद्यालय का फर्जी नियुक्ति पत्र, जिसमें जुलाई में कार्यभार संभालने को कहा गया था।
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धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब दीक्षित नियुक्ति पत्र लेकर विश्वविद्यालय पहुंचीं। वहां रजिस्ट्रार ने बताया कि सभी दस्तावेज फर्जी हैं और हस्ताक्षर भी जाली हैं। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया कि जब पीड़िता ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और गंभीर अपराधों में फंसाने की चेतावनी भी दी।

याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने समाज में बढ़ती उस “खतरनाक प्रवृत्ति” पर चिंता व्यक्त की, जहां लोग यह मानने लगे हैं कि रिश्वत देकर कुछ भी हासिल किया जा सकता है।

बेंच ने टिप्पणी की:

“यह समाज के बहुत निचले नैतिक स्तर को दर्शाता है। समाज में नैतिकता को फिर से बहाल करने के लिए इस तरह के अपराधों को बिना सजा के नहीं छोड़ना चाहिए।”

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हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीएचडी की डिग्री विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही अर्जित की जाती है। इसी तरह, शिक्षण पदों पर नियुक्ति विज्ञापन और उचित चयन प्रक्रिया के माध्यम से ही की जा सकती है।

आरोपों की सच्चाई पर कोई अंतिम राय व्यक्त किए बिना, हाईकोर्ट ने माना कि आरोपों की प्रकृति ऐसी है कि पुलिस द्वारा इसकी गहन और निष्पक्ष जांच जरूरी है।

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हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार के बाद, अब प्रियंका सेंगर और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और अन्य सुसंगत धाराओं के तहत जांच जारी रहेगी।

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