लखनऊ के स्कूलों के बाहर ट्रैफिक अव्यवस्था पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को लखनऊ स्थित कुछ बालिका विद्यालयों के बाहर स्कूल खुलने और छुट्टी के समय पर होने वाली ट्रैफिक अव्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई और उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी अगली सुनवाई में दे।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बी. आर. सिंह की पीठ, गोमती रिवर बैंक रेज़िडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में लखनऊ के प्रमुख स्कूलों के आसपास ट्रैफिक जाम और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर कई मुद्दे उठाए गए हैं।

कोर्ट ने स्टेशन रोड, चारबाग स्थित ए. पी. सेन मेमोरियल गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के बाहर ट्रैफिक की एक रिपोर्टेड घटना का संज्ञान लेते हुए राज्य के अधिवक्ता को इस पर गौर कर अगली सुनवाई तक स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया।

पीठ ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (ट्रैफिक) को भी अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर भीड़भाड़ कम करने के उपाय प्रस्तुत करने को कहा है। इसके साथ ही, स्कूल प्रतिनिधियों से भी कहा गया है कि वे अपने सुझाव न्यायालय द्वारा नियुक्त अमीकस क्यूरी के माध्यम से पेश करें।

पिछले आदेशों के अनुपालन में, सीएमएस-स्टेशन रोड, सीएमएस-गोमतीनगर एक्सटेंशन, सीएमएस-गोमतीनगर-I, सेठ एम. आर. जयपुरिया स्कूल, ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज और लोरेटो कॉन्वेंट इंटर कॉलेज जैसे प्रमुख स्कूलों के प्रतिनिधि अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने अपने-अपने विद्यालय परिसरों के बाहर ट्रैफिक भीड़ कम करने के लिए अपनाए गए उपायों की जानकारी दी और कुछ मामलों में राज्य सरकार व नगर निगम से मदद की मांग भी की।

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कोर्ट ने उल्लेख किया कि पहले यह सुझाव दिया गया था कि स्कूल यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को छोड़ने और लेने आने वाले अभिभावकों के वाहन स्कूल परिसरों के भीतर ही पार्क किए जाएं, लेकिन यह निर्देश “भावनाओं और मंशा” के अनुरूप पालन नहीं किया गया है।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 17 फरवरी तय करते हुए सभी पक्षों को निर्देश दिया है कि वे इस संबंध में उठाए गए कदमों और सुझावों की जानकारी समय से पहले दाखिल करें ताकि प्रभावी समाधान तय किया जा सके।

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